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बुधवार, 14 अक्तूबर 2009

तुम संग नाचूँ, गीत मिलन के गाऊँ


तुम संग नाचूँ, गीत मिलन के गाऊँ
अपनी धुनों से दीवाना तुमको बनाऊँ
प्यार के खेल में जीत ले हम बाजी
तुम संग नाचूँ, गीत, मिलन के गाऊँ

तुम कहो तो दुनिया से मैं लड़ जाऊँ
धरती क्या अम्बर में तूफान मचाऊँ
सागर की मौजो को गले लगाऊँ
तुम संग नाचूँ, गीत मिलन के गाऊँ

पंछी जैसे साथ तुम्हें ले मैं उड़ जाऊ
नील गगन में प्यार तुम्हें सिखलाऊँ
तराना प्यार का तुमको मैं सुनाऊँ
तुम संग नाचूँ, गीत मिलन के गाऊँ

दिल में अपने मूरत तुम्हारी है बनाई
किया है प्यार तुम्हीं से, ये है सच्चाई
साथ जियेंगे कसम ये है मैंने खाई
तुम संग नाचूँ, गीत मिलन के गाऊँ

-प्रतिबिम्ब बडथ्वाल

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत प्रवाहमय सुन्दर गीत!!

    उत्तर देंहटाएं
  2. पंछी जैसे साथ तुम्हें ले मैं उड़ जाऊ
    नील गगन में प्यार तुम्हें सिखलाऊँ
    बहुत सुन्दर गीत ---
    सुन्दर एहसास

    उत्तर देंहटाएं
  3. पंछी जैसे साथ तुम्हें ले मैं उड़ जाऊ
    नील गगन में प्यार तुम्हें सिखलाऊँ
    तराना प्यार का तुमको मैं सुनाऊँ
    तुम संग नाचूँ, गीत मिलन के गाऊँ
    bahut sundar kavita..!!
    Rawaani hai ismein..!!

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह...क्या उत्साह, उमंग है।
    भई यही स्वभाव हमें पसंद आता है।
    अच्छी रचना के लिए बधाई।

    उत्तर देंहटाएं

आपकी टिप्पणी/प्रतिक्रिया एवम प्रोत्साहन का शुक्रिया

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