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गुरुवार, 16 जुलाई 2009

मेरा वतन


कश्मीर से कन्याकुमारी को पहचान ले
बंगाल से गुजरात की ताकत जान ले
अपना कर्तव्य अब हम समझ ले
कमजोर नहीं हम दुश्मन अब जान ले

अहिंसा के पुजारी बसते है यहाँ
वीर सेनानी जन्म लेते है यहाँ
अतिथि का आदर करते है यहाँ
दुश्मनों को सबक सिखाते है यहाँ

आंतक यहाँ कोई न फ़ैलाने पाये
बुरी नज़र ना कोई लगने पाये
राजनीति ना हम को बांट पाये
आओ देशहित में हम साथ हो -जाये
-प्रतिबिम्ब बडथ्वाल्
( पहले की एक रचना)
प्र्

सोमवार, 13 जुलाई 2009

मुश्किल है अपने से दूर करना


आसान है तुमको गले लगाना

मुश्किल है अपने से दूर करना

आसान है प्यार का इजहार करना

मुश्किल है तुम बिन इंतज़ार करना

आसान है तुम से नज़रे मिलाना

मुश्किल है तुम से नज़रे चुराना

आसान है तुमसे प्यारी बाते करना

मुश्किल है तुम से रुठ कर बैठना

आसान है तुम से दोस्ती करना

मुश्किल है तुम से बेवफाई करना

आसान है तुम पर अहसान जताना

मुश्किल है तुम से अहसास छुपाना

आसान है तुम रुठो तो मनाना

मुश्किल है तुम से फासले बनाना

आसान है तुमको नज़रो में बसाना

मुश्किल है अपने से दूर करना


- प्रतिबिम्ब बडथ्वाल

(यह भी एक पुरानी रचना है)

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