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गुरुवार, 25 फ़रवरी 2010

परिवर्तन संसार का नियम है




परिवर्तन संसार का नियम है
नियम तोड़ने के लिये ही बनते है
तोड़ना या तोड़ – फ़ोड़ जुर्म है
जुर्म की कोई न कोई सज़ा है
सज़ा जुर्माना हो या फ़िर कैद
कैद में जानवर हो या फ़िर इंसान
इंसान अच्छा हो या बुरा
बुराई का छोड़ दो अब दामन
दामन किसका पकड़े या छोड़े
छोड़ ना देना साथ तुम मेरा
मेरे हो या अपने कैसे पहचाने
पहचान थोड़ी हो या गहरी
गहराई का है क्या कोई पैमाना
पैमाना चाहे अब कुछ परिवर्तन
परिवर्तन संसार का नियम है।



- प्रतिबिम्ब बड्थ्वाल, अबु धाबी
(पुरानी रचना दूसरे ब्लाग से)

1 टिप्पणी:

  1. रे हो या अपने कैसे पहचाने
    पहचान थोड़ी हो या गहरी
    गहराई का है क्या कोई पैमाना
    पैमाना चाहे अब कुछ परिवर्तन
    परिवर्तन संसार का नियम है।


    -बहुत बढ़िया!

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