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गुरुवार, 18 मार्च 2010

उनकी नज़र के दीवाने है



उनकी नज़र के दीवाने है

बस दीदार को तरसते है

आँखे बरबस उनको ढूंढती है

वो देखकर भी गुम हो जाती है



तन्हाई उनको पसंद है

मुझे उनका साथ पसंद है

यकीं है हमे कुछ ये भी

दिल में है कुछ उनके भी



छुप कर हमें खोजती है

खोज कर कुछ सोचती है

जाने क्या वो सोचती होगी

ढूढने के बहाने खोजती होगी



ये सफर रुकने न देंगे

यूँ ही हम चलते रहेंगे

ना जाने किस मोड़ पर

वो बन जाए हम सफर


-प्रतिबिम्ब बडथ्वाल 
(पुरानी रचना)

2 टिप्‍पणियां:

  1. ये सफर रुकने न देंगे
    यूँ ही हम चलते रहेंगे
    ना जाने किस मोड़ पर
    वो बन जाए हम सफर

    -सही है..सकारात्मकता बनी रहनी चाहिये. बढ़िया.

    उत्तर देंहटाएं
  2. ना जाने किस मोड़ पर

    वो बन जाए हम सफर
    lazvaab..bahut varsh pahle likha hoga aapne ...fir mulakaat ho gayi hogi ..K ji se !!:)

    Stay Blessed Prati ji

    उत्तर देंहटाएं

आपकी टिप्पणी/प्रतिक्रिया एवम प्रोत्साहन का शुक्रिया

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