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सोमवार, 19 जुलाई 2010

खून का दर्द....

खून का दर्द.....


खून से खून ने कहा एक दिन
जी नही सकता कोई हमार बिन

रगो में बहते है हम जिनके
वही हमें बहाते है खूनी बनके

रंग एक सा है चाहे बहे कंही भी
लेकिन खेलते है लोग इससे अभी भी

जिंदगी बन कर या मौत से मिलकर 
बहते हम ही है जीत बनकर या हार बनकर 

जीते हुये लोग भी नज़रअंदाज़ करते है
हमारी पौष्टिकता से खिलवाड करते है

अपना कह कर ये लोग कभी हमे अपनाते है
कभी अपने ही इसे झुठला कर चले जाते है 

ना जाने क्या क्या सेवन करते है
हर बात में बदनाम हमे कर जाते है

मौत का मंजर जब सामने आता है
छोड लावारिश हमे हर इंसान भाग जाता है

एक बार हमसे हर एक कोई प्यार करे
जीवन भर उनकी जिंदगी में हम रंग भरे

- प्रतिबिम्ब बडथ्वाल, अबु धाबी

2 टिप्‍पणियां:

  1. मौत का मंजर जब सामने आता है
    छोड लावारिश हमे हर इंसान भाग जाता है
    @ Prati ji sachchai ko vyakt kiya hai aapne..
    bahut sundar..............

    उत्तर देंहटाएं
  2. @..प्रति बाबा..@ ज़िन्दगी और मौत तो खेल हैं नियति के.. मैं तो कहता हूँ जियो जीवंत होकर और फिर मरने को एन्जॉय करो..

    उत्तर देंहटाएं

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