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शुक्रवार, 10 दिसंबर 2010

दोस्ती का आलम


मित्र बनाओ अभियान
बढाओ जान पहचान
बहुत है यंहा कद्रदान
सारे मित्र मेरे महान
महके मेरा खलिहान
जिंदाबाद हिन्दुस्तान

मुझे तुम लगते हो प्यारे
सपने जैसे सच हुये हमारे
हम है अब तुम्हारे सहारे
चलो साथ देखे अब बहारे
दोस्ती है बीच अब हमारे
चलो अब ये रिश्ता संवारे

एक हाथ मे उसका हाथ
दूजे हाथ में है दूजा हाथ
मन में भाये तीसरा हाथ
थामे अब चौथे का हाथ
येसे है मेरे कितने हाथ
छोड चले जो अब साथ

भरते है दोस्ती का दम
नही किसी से हम कम
वक्त पर छोड देते दामन
जैसे पडा हो कोई सामान
येसा है दोस्ती का आलम
सबको "प्रतिबिम्ब"का सलाम

-प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल , अबु धाबी

5 टिप्‍पणियां:

  1. आज की दोस्ती की सही तस्वीर दिखा दी ...अच्छी प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  2. सच्चाई बयां करती रचना के लिए बधाई स्वीकारें...

    नीरज

    उत्तर देंहटाएं
  3. क्या दोस्त ,अब दोस्त रह गया है /
    यह प्रश्न पढने के बाद कौंधता है

    उत्तर देंहटाएं
  4. मित्र बनाओ अभियान
    बढाओ जान पहचान
    बहुत है यंहा कद्रदान
    सारे मित्र मेरे महान
    महके मेरा खलिहान
    जिंदाबाद हिन्दुस्तान

    बहुत ही अच्छी रचना .... बधाई ...
    हिन्दुस्तान जिंदाबाद

    उत्तर देंहटाएं
  5. Wah Wah Prati ji

    aapka dostee ke pratii jajbe ko big salute

    Wonderful words as you are .

    Jai ho Mitr :)

    उत्तर देंहटाएं

आपकी टिप्पणी/प्रतिक्रिया एवम प्रोत्साहन का शुक्रिया

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