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बुधवार, 3 मार्च 2010

ये हम कैसे उन्हे बताये!!!


ये हम कैसे उन्हें बतायें ?




ख्वाब और हकीकत की ये कहानी

याद और अपने दिल कि जुबानी

प्यार और अपने जज़बात की नादानी

अहसास और शरारत की दीवानगी



कल और आज की रुसवाई

भाव और घावों की गहराई

वफा और बेवफाई की सच्चाई

कसमों - वादो की दुहाई



बिछोह और दूरी का गम

आंखो और होन्ठो की बैचैनी

तन और मन की कशिश

प्रेम और त्याग की परिभाषा

ये हम कैसे उन्हें बतायें ?


-प्रतिबिम्ब बडथ्वाल

मंगलवार, 2 मार्च 2010

"छरोली 2010" (होली) यूएई में

"छरोली 2010" (होली) यूएई में



संयुक्त अरब अमीरात में देव-भूमि उत्तरांचल/उत्तराखंड से जुडे हुये प्रवर्तीय लोगो ने 26 फ़रवरी 2010  ममज़ार पार्क, दुबई मे एकत्र होकर 'होली' रंगों का त्योहार के रूप में "छरोली 2010" पारंपरिक उत्तरांचली/उत्तराखंडी तरीके से उत्साह और उल्लास के साथ् मनाया। त्यौहार, जो बसंत की शुरुआत के साथ सभी वर्गों और आयु समूहों को एक साथ लाता है, लोग रंगो से खेलते है, मिठाई वितरित करते है और जुलूस के रुप में बाहर निकल कर साथ खेलते हैं। संयुक्त अरब अमीरात मे लगभग 250 प्रवर्तीय लोग, विभिन्न भागों से आयोजन  स्थल के पास आकर जमा हुये। यह आयोजन अमीरात के उत्तरांचली एसोसिएशन आफ एमीरात (यूएई ग्रुप) द्वारा आयोजित किया गया था उत्तरांचली/उत्तराखंडी  संस्कृति और मूल्यो को बढ़ावा देने के लिये तथा इसे अगली पीढ़ी सौपना/बतलाना था। यह आयोजन अपने मकसद में कामयाब रहा - उत्तरांचली/उत्तराखंडी लोगो को जोडना और सफलता पूर्वक अपनी संस्कृति से जुडना,जिसे आज भी हमारे गांवो में लोग अनुसरण करते है।

न्य लोगो के बीच(जो भी मौजूद थे अलग-अलग देशो से और समुदायो से) ममज़ार पार्क समुद्री किनारे, उत्तरांचल/उत्तराखंड का ये आयोजन आकर्षण का केन्द्र बना रहा। कुछ अरेबिक, फिलीपिन, चाइनीज़, अफगानी यूरोपियन लोगो ने तो हमारे साथ नृत्य भी किया और रंगो के साथ खेलने का अनुरोध भी किया। कोई भी अपने आप को रोक नही पाया इस संगीत रंगो के इस कार्यक्रम "छरोली" का हिस्सा बनने से।

त्तरांचल में लोग छरोली टोली बनाकर,रंग-बिरंगे कपडे पहनकर,हाथो में सफेद लाल झंडो के साथ गांव-गांव जाकर,थड्या गीत गाकर गांवो के लिये कुछ पैसे भी इकठ्ठा करते है। इसी भाव को महसूस करने के लिये श्री नन्दु नेगी जी ने स्वय को हरी पत्तियो से सजा कर, रंग-बिंरगे कपडे,कम्बल को धारण कर और हाथ मे तलवार लेकर पारंपरिक छरोली वेशभूषा का अहसास कराया। अन्य सदस्यों ने छरोली के झंडे (लाल और सफेद) लेकर उत्तरांचली/उत्तराखंडी धुनो पर  नृ्त्य  किया।  उस समय सभी ने महसुस किया जैसे वे उत्तरांचल/उत्तराखंड में हो।

च्चों के लिए छोटे पानी बंदूकों की व्यवस्था की गई थी जिससे वे इस आयोजन मे सक्रिय रूप से शामिल हो सके और हर एक ने किसी और की तुलना में अधिक आनंद लिया।

हाड़ी ढोल सबसे सभी संगीत वाद्ययंत्रो मे पंसद किया गया उस दिन बाकियो की अपे़क्षा। इतने सारे संगीतकार और गायक देखकर अच्छा लगा. जहां विनोद जैथुडी, नरेंद्र रावत और दीपक जखमोला ने संगीत वाद्ययंत्रो को बखूबी बज़ाया वही दूसरी तरफ अरुण ममंगाई, नन्दू नेगी, संतोष राणा, उदयराम ममगाई, गीता चंदोला और विमला रावत प्रतिष्ठित गायको की भांति शमा बांधने मे कामयाब रहे.

भी कार्यक्रमो के साथ साथ मौजूद महिलाओ और पुरुष बहनो भाईयो ने परम्परागत छरोली गीत (गढ़वाली थड्या गीत) और बेडु पाको बारा मासा (कुमाऊँनी लोक गीत) गीत गाये जो कि झुमेलो नृत्य के द्वारा समर्थित किया गया। बहुत सारे महिलाओ और पुरुषो मे उत्तरांचली/उत्तराखंडी शैली नृत्य की अच्छी प्रतिभा की झलक दिखी,जो हम दूसरों को सिखाने के लिए उपयोग कर सकते है।

त्तरांचल /उत्तराखंड का परंपरागत अहसास नाश्ते मे भी शामिल किया गया। पारंपरिक "गुझिया","नमक पारे", और "उड़द के पकौड़ै"( जो महिला सद्स्यो ने घर पर बनाये थे) परोशे गये।

अंत में सभी उत्तरांचली/उत्तराखंडी भाई बहनो ने अपनी जड़ों के करीब महसूस किया और वादा किया अपनी संस्कृति और समुदाय की पहचान बनाने के लिये प्रयास का सभी ने 19 मार्च 2010 को "होली मिलन और सांस्कृतिक पिकनिक" अबु धाबी एअरपोर्ट गार्डन मे फिर से एक्त्र होने का वादा किया। गर्व और अपनेपन की भावना के साथ इस कार्यक्रम का समापन हुआ।

प्रतिबिम्ब बड्थ्वाल
टीम यूएई ग्रुप
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