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गुरुवार, 18 मार्च 2010

उनकी नज़र के दीवाने है



उनकी नज़र के दीवाने है

बस दीदार को तरसते है

आँखे बरबस उनको ढूंढती है

वो देखकर भी गुम हो जाती है



तन्हाई उनको पसंद है

मुझे उनका साथ पसंद है

यकीं है हमे कुछ ये भी

दिल में है कुछ उनके भी



छुप कर हमें खोजती है

खोज कर कुछ सोचती है

जाने क्या वो सोचती होगी

ढूढने के बहाने खोजती होगी



ये सफर रुकने न देंगे

यूँ ही हम चलते रहेंगे

ना जाने किस मोड़ पर

वो बन जाए हम सफर


-प्रतिबिम्ब बडथ्वाल 
(पुरानी रचना)

सोमवार, 15 मार्च 2010

विक्रम संवत 2067

"नवरेह्","उगादि","गुडी पाडवा","चैती चांद" एवम नववर्ष की सभी ब्लागरो व भारतियो को शुभकामनाये!!
प्रतिबिम्ब एवम परिवार 

रविवार, 14 मार्च 2010

याद आने लगी!!!!




अंगडाई लेती पुरवाई लेकिन

याद तुम्हारी ले आई


तन से कोसो दूर लेकिन

मन के बहुत करीब


आती शरमाती हुई लेकिन

कमर बल खाती हुई


खामोशी छाने लगी लेकिन

दिल शरारत करने लगा


संभलने लगे अहसास लेकिन

गर्म होने लगी साँस


पलके झुकने लगी लेकिन

होंठ थिरकनें लगे


मुझ को होश नहीं लेकिन

धड़कने बढ़ने लगी


शाम ढ़लने लगी लेकिन

रात जवाँ होने लगी


सपने पूरे होने लगे लेकिन

हकीकत समझ आने लगी


हम तुम बिछड़ने लगे लेकिन

याद तुम्हारी फिर आने लगी।


-प्रतिबिम्ब बड्थ्वाल
(पुरानी रचना)
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