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बुधवार, 19 मई 2010

मै अबला हूँ!!!



मैं अबला हूँ
सदियो से हारती आई हूँ
यही हम कहते आये है।

मुझे हर पल कोसा गया
मेरे अर्थ को निर्थक किया
यही हम कहते आये है।

वेदना ही मेरा अस्तित्व है
हर पल मुझ पर जुल्म हुये
यही हम कहते आये है।

दुर्गा हो या पार्वती
गाते सब मेरी आरती
कहो कौन जीता कौन हारा?

सीता हो या सावित्री
पतिव्रता की है हम निशानी
कहो कौन जीता कौन हारा?

पीटी उषा हो या किरन बेदी
देश का सम्मान हमने है बढाया
कहो कौन जीता कौन हारा?

इंदिरा हो या प्रभा पाटिल
देश पर है राज किया
कहो कौन जीता कौन हारा?

हर युग की शान है नारी
प्रेम त्याग सम्मान का अर्थ हमसे बनता
कहो कौन जीता कौन हारा?

आज हम क्यो रोये रोना
स्वयं तैयार हमे है होना
फिर देखे  कौन जीता कौन हारा?

कसूरवार है जो नर नारी
उनको है सीख सिखानी
फिर देखे  कौन जीता कौन हारा?

दोष क्यो समाज को दे
अपने अधिकार का हम प्रयोग करे
फिर देखे  कौन जीता कौन हारा?

सदियो से सश्क्त है नारी
नर से करे न हम अंतर भारी
फिर देखे  कौन जीता कौन हारा?

चले साथ हम नर और नारी
सच्चे मन से निभाये अपनी जिम्मेदारी
फिर देखे  कौन जीता कौन हारा?

हर एक को शिक्षा और स्वास्थ्य मिले
भूख और गरीबी का नामो निशान मिटे
फिर देखो केवल हिन्दुस्तान जीतेगा।

(प्रतिबिम्ब बड्थ्वाल, अबु धाबी, यूएई)

रविवार, 16 मई 2010

करता धन्धा हूँ

खुदा का बन्दा हूँ 
आंख होते हुये भी बना अन्धा हूँ
करता धन्धा हूँ

करता धन्धा हूँ
कभी खुशियो का
खुशियां छीन लेने का हक रखता हूँ

करता धन्धा हूँ
कभी प्यार का
प्यार पाकर बेवफाई करना जानता हूँ

करता धन्धा हूँ
कभी दोस्ती का
पीठ पर छुरा घौंपने का आदी हो चुका हूँ

करता धन्धा हूँ
कभी रिश्तो का
रिश्तो से मुंह मोडने में अब माहिर हूँ 

करता धन्धा हूँ
कभी अपनो का
अपनो को बेगाने करने का हुनर जानता हूँ

करता धन्धा हूँ
कभी समाज का
समाज को बांटने का  धर्म जानता हूँ 

करता धन्धा हूँ
कभी देश का
देश को बेच डालने की काबलियत रखता हूँ

हां मै जिन्दा हूँ
खुदा का बन्दा हूँ
लेकिन इंसानियत से करता धन्धा हूँ

कुछ पल सोच लेता हूँ
अच्छा बुरा सोच लेता हूँ
अगले पल फिर अंधा हो जाता हूँ

फिर से करता धन्धा हूँ
हां मै जिन्दा हूँ
खुदा का बन्दा हूँ

-प्रतिबिम्ब बड्थ्वाल 
अबु धाबी, यूएई
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