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शुक्रवार, 22 अप्रैल 2011

आज भी जारी है.....


आज भी जारी है.....

लिखने से भी क्रांति आती है
कभी इससे भ्रांति हो जाती है
लिखने से समाज बदल सकता है
इससे देश की सोच बदल सकती है

आज मैने सोचा कि
मै भी कुछ सिखा पाऊँ
या किसी को बदल दूँ
अपने लेखो से
अपने विचारो से
अपनी कविताओ से।

मै शायद अपने में
पूर्ण नही
फिर भी दूसरे को
बदलने का दम भरता हूँ
अपनी सोच को
लोगो पर थोपने
का अथक प्रयास करता हूँ

फिर एक सोच जागृ्त हुई
इंसान कोई हिन्दू है कोई सिख है
कोई इसाई है तो कोई मुस्लिम है
सबके अपने ग्रंथ है,पवित्र पुस्तके है
सभी उसे मानने का दम भरते है
पढे या ना पढे लेकिन अपना कहते है
जब वो सिंद्धांत किसी को बदल ना पाये
वो विचार किसी को मार्ग ना दिखा पाये
उस सत्य को जब कोई पहचान ना पाये
प्रेम और सीख को कोई जब अपना ना पाये
गीता, कुरान, बाईबल और गुरु ग्रंथ
जो ना कर पाये
क्या मेरे ये काले अक्षर उनको बदल पायेगे
क्या मेरे विचार और सोच उनको बदल पायेगे

फिर भी
मेरा प्रयास और लिखना निरंतर जारी है
बुरे और अच्छे को लिखना आज भी जारी है
सिखा तो नही पाऊँगा लेकिन लिखना जारी है
स्वयं को स्वयं का आईना दिखाना अभी जारी है
जीवन के हर मोड पर मेरा सीखना आज भी जारी है

-प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 

5 टिप्‍पणियां:

  1. प्रयास और लिखना निरंतर जारी रहना चाहिए , शुभकामनायें

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  2. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (23.04.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:-Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

    उत्तर देंहटाएं
  3. स्वयं को स्वयं का आईना दिखाना अभी जारी है
    जीवन के हर मोड पर मेरा सीखना आज भी जारी है...

    सुन्दर भाव....सुन्दर कविता....
    हार्दिक बधाई !

    उत्तर देंहटाएं
  4. bahut sundar prati ji....pahli baar aapke blog par aai hun...bahut achha lga..

    उत्तर देंहटाएं

आपकी टिप्पणी/प्रतिक्रिया एवम प्रोत्साहन का शुक्रिया

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