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शनिवार, 23 अप्रैल 2011

अदला बदली


चल खेले खेल
अदला बदली का
तू डाल - डाल
मै पात - पात

तू मै बन जाऊँ
मै तू बन जाऊँ
तेरा गरुर मै ले लूँ
मेरा सरुर तू ले ले

दे दे मुझको
अपना मन
अपना दिल
अपनी  खुशी

मै तुझे देता हुँ
अपना प्यार
अपना इकरार
अपना अंतर्मन

अब देखो जो कहना
कहने से पहले सोच लेना
और जो मै कहूँगा
उसे भी तुम सुन लेना

अरे...
खेल शुरु होते ही
तुमने हार क्यो मान ली
मैने तो तुम बनकर
तुम्हें जीत दे दी
अपनी हार स्वीकार ली

तुमने वही किया
जो मैंने किया
हार कर भी
हम जीत गए
एक दूजे को
शायद
अब समझ गए

अब ना कहना ....... 

-प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 

2 टिप्‍पणियां:

  1. प्रतिबिम्ब जी सदा की तरह अति सुन्दर भावुक रचना.....शुभ कामनाएं...

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आपकी टिप्पणी/प्रतिक्रिया एवम प्रोत्साहन का शुक्रिया

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