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रविवार, 15 मई 2011

फिर भी तेरा इंतज़ार ........





मै कोई ख्वाब तो नही
तू एक ख्वाब ही सही

मानता हूँ
तू मेरा प्यार है
जानता हूँ
मै तेरा प्यार नही
मानता हूँ
मै तेरा नसीब नही
जानता हूँ
तू मेरे नसीब मे नही

पलो को समेटने का मन
तेरे करीब लाता है
तुझे पास ना पाकर
वापिस लौट आता है
याद कुछ और भी आता है
फिर अकेला मै हो जाता हूँ

तू सितारा है उस आसमा का
जिसमे साथ है और सितारो का
मै तो धरती पर खडा
देखता हूँ नम आंखो से
जानता हूँ तुझ तक
पहुंचना मुमकिन नही
फिर भी आस है मन की,
दूर जाती नही

मौसम बदलते है जब
आसमां भी रंग बदले
छुप जाते है सितारे
मन मेरा बस तुझे पुकारे

आप को चाँद से है प्यार
हम को आपसे है प्यार
चांद से बाते होंगी
शरारते भी होंगी
शायद एक दिन
मिलन भी होगा
हम कुछ न कहेंगे
सिर्फ तुझे देखते रहेंगे  

हम फिर भी रहेगे
तेरे ही इंतजार में
शायद फिर देख पाऊँ
अपने प्यार को
एक नज़र भर
एक नज़र भर

-          प्रतिबिंब बड़थ्वाल 

4 टिप्‍पणियां:

  1. हम फिर भी रहेगे
    तेरे ही इंतजार में
    शायद फिर देख पाऊँ
    अपने प्यार को
    एक नज़र भर
    एक नज़र भर

    bahut khoob...

    उत्तर देंहटाएं
  2. कल 28/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं

आपकी टिप्पणी/प्रतिक्रिया एवम प्रोत्साहन का शुक्रिया

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