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मंगलवार, 23 अगस्त 2011

सुनो !!! चलो !!! आओ !!!



सुनो !!!
आज़ादी की हमने
देखी और सुनी लड़ाई है
शांति और बलिदान से
पाई हमने पहले भी स्वंत्रता है
आज फिर हम गुलाम बने है
भ्रष्टाचार की हमने डाली बेड़िया है
इससे मुक्ति दिलाने को
देखो आया अब दूसरा गांधी है


भ्रष्टाचार !!!
मेरे अंदर भी है
तेरे अंदर भी है
लेकिन आज
स्वयं से लड़ने को
हमें अब तैयार होना है
अन्ना ने मुझे जगाया है
अब मुझे देश को जगाना है


चलो!!!
एक कदम तुम बढ़ाओ
एक कदम मैं भी बढ़ाऊँ
अन्ना के बढ़े कदम संग
अपने कदम मिलायेँ
भ्रष्टाचार के दानव को
अब अपनी राह से हटायेँ
युवाओं ने अब आंखे खोली है
अन्ना की बंदूक की ये गोली है
नई स्वंत्रता की ये सजी डोली है
यही असली लोकतंत्र की बोली है


आओ!!!
64 सालो से जिसे बढ़ाया
अब इस पर विराम लगायें
मूक था देशवासी अब तक
अब आवाज़ इसे अपनी बनायें
सो रहे हैं नेता जो राजा बनकर
उन्हे अपनी पहचान हम बतायें
साक्षी होगा इतिहास भी
बदलाव देखा है और अब दिखाना है


आओ !!!
इतिहास के पन्नो पर
नाम अपना यूँ लिखवां दें
जल उठी है जो लौ
उसे अब मशाल बना दें
थाम कर हाथ अहिंसा का
राह को अब रोशन कर दें
इस यज्ञ मे आहुति देकर
आओ भ्रष्टाचार को अब मुक्ति दें

प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 

2 टिप्‍पणियां:

  1. सुनो !!! चलो !!! आओ !!!-- Excellent composition. भ्रस्टाचार के खिलाफ आम जनता का बढ़ता जनाक्रोश 64 सालो से झूठी आजादी के नाम पर झंडे फहराते - फहराते आम आदमी भूल चूका था की इस झंडे की सही उपयोगिता क्या है आजादी के इतने सालों के बाद, अब सही अर्थो में देश की जनता ने झंडा की उपयोगिता और फहराने का काम किया है ..
    आज देश में एक नया इतिहास लिखा जा रहा है हम भी इस इतिहास का हिस्सा बनें नहीं तो आने वाली पीढियां हमसे पूछेंगी की क्या आप आजादी की दूसरी जंग में शामिल थे?

    उत्तर देंहटाएं
  2. ये बात सही है, भ्रष्टाचार तेरे अंदर भी है, मेरे अंदर भी, खुद से लड़ने के लिए तैयार होना पड़ेगा।

    उत्तर देंहटाएं

आपकी टिप्पणी/प्रतिक्रिया एवम प्रोत्साहन का शुक्रिया

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