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बुधवार, 15 अगस्त 2012

मैं भारत



मैं भारत बोल रहा हूँ
आज तुम खुद को 65 का बता रहे हो
आज़ादी का जश्न मना रहे हो
मैं सदियो से इस ब्रह्मांड में हूँ
अपने अस्तित्व को बनाए रखा
विश्व में तुमको अग्रणी स्थान दिया
संस्कृति व सभ्यता का तौहफा दिया
तुमको नाम दिया काम दिया
तुमको जीने का हर मंत्र दिया
वेदो ग्रंथो द्वारा तुमको जीवन का सार दिया
किसी न किसी रूप मे जीने का सूत्र दिया
लेकिन तुम खुद मे इतना खो गए
कि जिसने जब चाहा तब लूटा
न जाने कितने मुझ पर वार हुये
हर बार गिरते हो फिर संभलते हो
लेकिन वही भूल हर बार कर जाते हो
फिर तुम एक दूजे को भूल जाते हो
हर युग मे क्रांतिकारियों ने जन्म लिया है
मेरे अस्तित्व की खातिर प्राणो की आहुति दी
लेकिन तुम उनके बलिदानों याद नही रखते
रोज भारत के प्रति सोच नही सकते
एक दिन याद कर वंदे मातरम कहते हो
इतिहास गवाह है कितने दुकड़े तुमने मेरे किए
देखो अखंड भारत के तुमने ये कितने खंड किए
एक दूजे के प्रति ईर्ष्या रखते हो
खुद कुछ भी करने से तुम डरते हो
धर्म का आडंबर ओढ़ कर आज अपनों से लड़ते हो
सुरक्षा को दूसरे की खातिर नज़र अंदाज़ करते हो
मेरे तन पर को आज भी बांटने का खेल चल रहा
धर्म के नाम पर साजिश और खूनी खेल चल रहा
इसी कारण कुछ वर्ष पहले अंग्रेज़ो के आधीन हुये
कुछ वीरो और शहीदो के कारण फिर स्वाधीन हुये
आज भी समय है खुद को भारत का हिस्सा मानो
आंखे खुली व सीना चौड़ा रख देश का गौरव बनो
मेरे अस्तित्व का मान रख देश को सर्वोपरि मानो
आज जन-जन के हृदय मे भारत को अपना मानो
मैं भारत फिर से तुम्हें अपना होने का न्यौता देता हूँ
हाँ मैं 'भारत' बोल रहा हूँ, हाँ मैं 'भारत' बोल रहा हूँ
...... प्रतिबिम्ब बड्थ्वाल

2 टिप्‍पणियां:

  1. मैं भारत बोल रहा हूँ

    तुमको नाम दिया काम दिया
    तुमको जीने का हर मंत्र दिया
    वेदो ग्रंथो द्वारा तुमको जीवन का सार दिया
    किसी न किसी रूप मे जीने का सूत्र दिया
    सत्य वचन प्रति जी

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