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बुधवार, 20 नवंबर 2013

ये दुनियां ....




अँधेरे बहुत है 
उजाले कम है 
यहाँ 
थोड़ी खुशियाँ है
जुड़े कितने गम है
कितने बेबस हम है

वक्त की कसौटी
मांग रही हौसला
लेकिन
अंग अंग बिखरा सा
तन मन बोझिल सा
रोम रोम सिसकता सा

कांटो की सेज सजी
पल पल चुभता है
अब
फूल एक कोने में
खड़ा मुस्कराता है
ज़ख्म हरा करता है

मेरे अस्तित्व को
रोज रोज ठेस लगती है
दुनिया
मंद मंद मुस्काती है
तमाशा देखती जाती है
बहती गंगा में हाथ धो जाती है

- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल

जलता कौन नही है




कोई गम की आग में
कोई कर्म की कसौटी पर
कोई इर्ष्या की तपन में
कोई शीर्ष की देहलीज पर
कोई प्रेम अगन में
कोई अहंकार की गरमी पर
कोई दुशमनी की आँच में
कोई भ्रम के धुएं पर
कोई क्रोध की ज्वाला में
कोई अपनों की बेवफाई पर
कोई वक्त की आँच से
कोई दुनिया से रुखसत होने पर

लौ इस दिए की
शायद कुछ कह रही है
जलना है तो ऐसे 'प्रतिबिंब'
खुद जल रोशन दुनिया करो


-प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 

रविवार, 17 नवंबर 2013

आईना - ए - जिंदगी





अमीर गरीब की बढ़ती खाई
सियासत की ये चाल भाई
स्वार्थ ने है पैठ बढाई
इंसानियत की देते सब दुहाई

खुशी कही पलके बिछाए
गम कही है डेरा जमाए
कर्म धर्म का जाल फैलाए
जिंदगी आइना दिखाती जाए

दर्द झेल रहा कोई
खेल समझ रहा कोई
किस्मत कहे 'प्रतिबिंब' कोई
बुरा वक्त समझ रहा कोई

शनिवार, 16 नवंबर 2013

चल साईं तेरे दरबार चले




तेरा प्यार तेरा दुलार मिले 
देख रूप तेरा सुकून मिले 
कर दर्शन आशीर्वाद मिले 
चल साईं तेरे दरबार चले 

तेरी भक्ति का प्रसाद मिले 
तेरी शक्ति का आभास मिले 
तेरी दृष्टी का अहसास मिले 
चल साईं तेरे दरबार चले 

शिरडी में तेरा अंश मिले 
हर छोर में तेरे भक्त मिले 
तेरी श्रद्धा का चमत्कार मिले 
चल साईं तेरे दरबार चले 

हर अनुयायी को तेरा प्रेम मिले 
भक्तो को उनके भगवान मिले 
'प्रतिबिंब' को भी तेरा साथ मिले 
चल साईं तेरे दरबार चले

रविवार, 3 नवंबर 2013

मेरी शुभकामना इस नाइट



चहुँ ओर दिवाली की चमकेगी आज 'लाइट'
आप सब मित्रो का भविष्य हो बहुत 'ब्राइट'
आपके गमो की सारी हवा हो जाए 'टाइट'
प्रेम संदेश फैलाए, मित्रो संग न हो 'फाइट'

हो गई सब जगह रोशनियों भरी 'साइट'
भक्ति रस का माहौल होगा सारी 'नाइट'
स्वार्थ हावी न हो 'प्रतिबिंब', कदम बढे 'राइट'
खुशियों की भर कर आपके घर आए 'फलाइट'

- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 

रविवार, 27 अक्तूबर 2013

पन्ना मोहब्बत का




खोल दिल की किताब
बांच लेना बोल मोहब्बत के
कब तक पन्ने पलटते रहोगे
निकल न जाए मौसम प्यार के

इस पन्ने को पढ़ कर
प्रेम का दिया दिल में जला लेना
किताब का मोल न लगाना
बस उभरे भावो को समेट लेना

आँखों में पनप दिल में उतरता है
दिल दिमाग संग सफ़र करने लगता है
सोच रुक जाती है उस हम सफ़र तक
सपनों को जीने का  फिर दिल करता है

प्यार में देना ही मोहब्बत है
प्यार को पाना नसीब की बात है
'प्रतिबिंब' जीते है लोग रह कर जुदा
प्यार करने वालो के दिल में बसता खुदा

प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल

रविवार, 13 अक्तूबर 2013

विजय दशमी


[नवमी और विजय दशमी की सभी मित्रो को बधाई एवं शुभकामनायें ]


खुशी और सफलता की सदा लगी रहे बौछार 
चलो मनाये मिलकर विजय दशमी का त्यौहार 
असत्य पर सत्य का, करते रहे हम सदा प्रहार 
अहंकार का छोड़ कर पथ, बुराई का करे संहार 

आओ रीति नही कुरीतियों को अपनी बदल डाले 
आओ संस्कृति और संस्कार की फिर से नीव डाले 
अधर्म का छोड़ कर साथ, धर्म हम अपना समझ ले
कर्म को मान कर पैमाना, भाग्य हम अपना बदल ले  

अन्दर जितने है रावण, आओ उनका हम त्याग करे 
समाज के हर वर्ग को दे सम्मान, प्रेम का संचार करे 
बन कर खुद ही अच्छाई का प्रतीक, राम का मान करे
प्रकृति से निभा दोस्ती, पर्यावरण सरंक्षण का प्रण करे 


-प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 

शनिवार, 14 सितंबर 2013

मेरा प्रेम


अनदेखा कैसे कर दूं
प्रेम अपना कैसे छिपाऊँ
तुम्हे बचपन से देखा है
तुम्हे ही मन में सोचा है
तुम मधुर, सुन्दर दिखती हो
हाँ हर रूप में अपनी लगती हो
तुम मेरा गौरव हो
तुम मेरी पहचान हो

मेरे जीवन पर
तुम्हारा ही प्रभाव है
हाँ अन्य को देखा
पढ़ा सुना जाना पहचाना
लेकिन तुम से प्रेम था
तुम से प्रेम है, और
तुम से प्रेम बना रहेगा

मैं चाहता हूँ
बाकी भी तुमसे यूं प्रेम करे
मुझसे भी ज्यादा करे
तुम इस प्रेम की हक़दार हो
हर भारतीय तुम से प्रेम करे
तुम्हे मान दे सम्मान दे

तुझे जिसने भी
अपना बनाया
अपने लेखो में
अपनी कविताओ में
अपने उपन्यासों में
अपने निबंधो में
अपने शोध में
वे सभी आज
तुझसे ही पहचाने जाते है
हाँ हम उनका सम्मानकरते है
चाहता हूँ सभी सम्मान करे
उन्हें याद रखे और
तुझे अपना कर प्रेम करे  

हिन्दी!!!
हाँ मैं तुमसे
प्रेम करता हूँ
और करता रहूँगा
तेरे सम्मान के लिए
अपना योगदान देता रहूँगा ...

- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 

मंगलवार, 27 अगस्त 2013

फ़ूड [वोट] सिक्यूरिटी बिल



आखिर लोक सभा में
वोट सिक्यूरिटी बिल पास हो गया
सपना सत्ता में वापिस आने का
आखिर एक कदम आगे बढ़ ही गया

ठोस कुछ किया नही
घोटालो के मामले बने है सत्ता का रोड़ा
एक मात्र सहारा नाम गरीब का
वोट सिक्यूरिटी बिल से सकूं मिला थोडा

गरीब देख हक्का बक्का है
६५ वर्षो से गरीबी खेल का बना एक्का है
गरीब को मिटा आंकड़ो से खेल
इतने सालो में बस वोट को किया पक्का है

आंकड़ो का मनभावन खेल
खेलती और पीठ थपथपाती अपनी सरकार
बढ़ती महंगाई और गिरता रुपया
ले नाम गरीब का, जनता का करते तिरस्कार

अपना हित देखती सरकार
करने इसे पूरा संसद को बनाती हथियार
गरीब और अल्पसंख्यंक है बस मुद्दा
ये दोनों ही है उसके अपने वोट बैंक आधार

गरीब और अल्पसंख्यंक
हालात आज भी नही बदले है, जहाँ थे वही खड़े है
एक को लोलीपोप, दूसरे को आरक्षण
इसके सिवाय दिया क्या, लोग एक दूजे से लडे है

- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल

शनिवार, 17 अगस्त 2013

तेरी थाली मेरी थाली




हो तेरी थाली या मेरी थाली
अब प्याज बिन लगती गाली
रोटी प्याज की थी हम जोली
किसने इस पर बुरी नज़र डाली
बिन प्याज हुई अब गरीब की थाली
तेरी थाली मेरी थाली लगती खाली

दोस्त या दुश्मन, बीबी हो या साली
सबने है अब प्याज से दूरी बना ली
प्याज बिन है अब ये सब्जी की थैली
महंगाई पर सत्ता ने चुप्पी साध ली
आम आदमी की जेब  हो रही खाली
तेरी थाली मेरी थाली लगती खाली

गरीबी की नई परिभाषा बना ली
गरीब और अमीर की खाई बढ़ा ली
देकर चांवल आटा सब्जी छीन ली
देकर प्रलोभन अंतरात्मा खरीद ली
गरीब को गरीब करने की ठान ली
तेरी थाली मेरी थाली लगती खाली

- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 

बुधवार, 7 अगस्त 2013

जिन्दगी कभी यूं भी ....




तूफ़ान से की थी दोस्ती, वो रोशनी बुझा गया
खौला था जो खून, अरमान सारे झुलसा गया
चला जब अंगारों पर, सपनो को जलाता गया
फूलो की ख्वाइश में, कांटो से छलनी हो गया

माना था जिसे दोस्त,  वो दुश्मनी निभा गया
समझा जिसे अपना,  वो आज पराया हो गया
वफ़ा की थी जिससे उम्मीद, वो बेवफा हो गया
दस्तूर दुनिया का, जिसे चाहा वो दूर हो गया

किया जुर्म दिलो ने, लम्हो से शिकायत हो गई
माँगा मशविरा अपनों से, बात अपनी आम हो गई
दुश्मन की चाल 'प्रतिबिंब' काम अपना कर गई
धोखा दे गई किस्मत और बदनाम हमें कर गई  

शनिवार, 27 जुलाई 2013

सलाम टेलीग्राम


फेसबुक समूह 'तस्वीर क्या बोले' में लिखे गए भाव 


~सलाम टेलीग्राम~


सेम्यूल मोर्श की सोच ने विश्व को दी थी ये नई सौगात
दूर संचार में हुई क्रांति, जब टेलीग्राम का हुआ अविष्कार
२४ मई १८४४ को पहला टेलीग्राम वासिंगटन से बाल्टीमोर
संक्षिप्त में हर खबर पहुँचाने का फिर देश में हुआ विस्तार

छुट्टी आना हो, नौकरी मिलना हो या फिर हो कोई भी अवसर
टेलीग्राम से ही मिलता था तुरंत ही खुशी गम का हर समाचार
१६३ साल की संस्कृति को अब सदा के लिए लग गया विराम
इतिहास हुए अब मशीन की वो टूक-टूक-ट्रा, तारबाबू और तारघर

नई तकनीक का आना और फिर उसका यूं हमें विदा कहना
समझा गया हमें, जिन्दगी और रिश्तो का भी हाल यही होगा
चला गया उसे जाना था 'प्रतिबिंब', नई सोच को स्थान दे गया
अब म्यूजियम की शान बनेगा, टेलीग्राम तू हमें सदा याद रहेगा

[ https://www.facebook.com/groups/tasvirkyabole/ ]

गुरुवार, 25 जुलाई 2013

चलो जश्न मनाये .....



मैं आज गरीब नही हूँ
किसी को रहम आया
जलेबी ब्रेड मेरे नसीब में आया
आज मैं खुश हूँ
देश की ६५ सालो की गरीबी दूर हुई
गरीब का मूल्य ३० रुपये ठहराया
और गरीबी को आंकड़ो से दूर भगाया

चलो आओ खुशियाँ मनाये
दाल रोटी हम १२ रुपये में खाएं
अरे सरकारी नेताओ
फ़ूड सिक्योरिटी बिल पर क्यों करोडो लगाते?
जब ५ और १२ में खाना मिल जाता
गरीब और अल्पसंख्यंक आज भी वही खड़ा है
तुम्हारे वादों के अहसान तले ज्यों का त्यों दबा पड़ा है

पर अब मजाक करने की भी हद होती है
मार रहे हो हमें दिन प्रतिदिन महंगाई से
जलता है रोज कलेजा
उस पर नमक छिड़क रहे हो
उड़ा लो हमारी तुम खूब खिल्ली
चलो मान ली आपकी दरिया दिली
५ रुपये में मिलेगा भर पेट खाना
लेकिन ५ या १२ रुपये मैं कहाँ से लाऊं ???


-    -  प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल

रविवार, 21 जुलाई 2013

हैल्लो जिन्दगी



नमस्कार जिन्दगी !
न जाने तुम कब आगे निकल गई
सुप्रभात, नमस्कार को छोड़ पीछे
अब तुम 'हैल्लो जिन्दगी' हो गई

अपनाया था अपना समझ
आज तुम पराई हो गई
खेल रही हाथो में उनकी
दौड़ पूर्व से पश्चिम की हो गई

खो दिया अपनी अमानत को
भारतीयता अब 'इन्डियन' हो गई
संस्कार और संस्कृति हमारी
शायद अब कोई भूली कहानी हो गई

सोचा था विरासत अपनी सौंप देंगे
पर ये पीढी खुद में सिमट कर रह गई
देखे थे सपने बहुतेरे पर जागे नही
जब जागे तो उम्मीदे सब स्वाहा हो गई

नमस्कार जिन्दगी !
अब तुम 'हैल्लो जिन्दगी' हो गई

- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 

बुधवार, 17 जुलाई 2013

मेरा पहाड़ (त्रासदी के एक महीने बाद )




आज
एक महीना हुआ
पहाड़ में हुई उस तबाही को
उस मंजर की तस्वीरे
उस त्रासदी के वीडियो
उस विपदा पर बहस
उस राहत पर राजनीति
शायद कुछ दिनों में बंद हो जाए

लेकिन
मेरे पहाड़ पर आपदा
मेरे पहाड़ ने जो सहा
मेरे पहाड़ ने जो देखा
वर्षो वर्षो तक इसका दर्द
दर्द बनकर ही रहेगा
अपनी जमीन अपने लोग
अपने जंगल अपने रास्ते
अपने गाँव अपनी विरासत
जिन्हें हम खो चुके है
मेरा पहाड़ कैसे भूल पायेगा

हाँ
वक्त के साथ फिर निर्माण होगा
मेरा पहाड़ फिर चार धाम होगा
पर्यटकों का फिर आवागमन होगा
मेरे पहाड़ के लोग फिर खड़े होंगे
भूलो को सुधार फिर जीना सीखेंगे
अपनी गलती से सीख फिर
खूबसूरत पहाड़ का निर्माण करेंगे

हाँ
आज श्रधांजलि उन्हें
जो लौट कर न आये
भगवान की शरण गए
और उनके ही हो गए

हे प्रभु
था तो कठोर तुम्हारा निर्णय
किया अपनों को अपने में विलय
बस अब तुम रक्षा करना
कुछ गलत न हो अब ध्यान रखना
सद्बुद्धि दे  हमें आशीर्वाद बनाये रखना

-प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल

सोमवार, 8 जुलाई 2013

मेरा पहाड़




मेरा पहाड़
है भूमि देवो की
मेरा पहाड़
है विरासत संस्कृति की,
मेरा पहाड़
है कहानी संस्कार की
मेरा पहाड़
है मिसाल मानवता की

मेरा पहाड़ और उसका दिल
आज रोता है
मेरा पहाड़ और उसका हौसला
टूटा है
मेरा पहाड़ और उसका सम्मान
गिरा है
मेरा पहाड़ और उसका भगवान
रुष्ट है

मेरे पहाड़ को
अपनों ने तोडा और मरोड़ा है
देख लिया नतीजा
अब शमशान बना कर छोड़ा है
राजनीति का खेल
इंसानियत ने यहाँ दम तोडा है
डूब गए ख्वाब
लेकिन अभी जीना नही छोड़ा है

- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल

शनिवार, 29 जून 2013

मैं पहाड़



मैं पहाड़


हाँ मैं पहाड़ !!
यूं तो पहाड़
हर जगह  विद्दमान है
मेरी खूबसूरती और मौसम
मनुष्य के मन को
शांति और सुकून देती है
शायद इसलिए
तुम्हारी आस्था के भगवान भी
सदियों से यहाँ विराजमान है ......

लेकिन समय के साथ
विकास के नाम पर
मेरे सीने पर इन्सान ने
विनाश की इबारत बना दी है
भगवान के नाम पर
न जाने कितने भगवान
मुझ पर बेहिसाब लाद दिए
पर्यटन के नाम पर
बेहिसाब दुकान और होटल
मुझे खोखला कर रहे है

जंगल और पेड़ मेरा अस्तित्व
आज विकास की भेंट चढ़ गए
नदियों से मेरा जीवन
जिसके किनारो को तुमने हड़प लिया
हे मानव !! अपने जीने के लिए
तुम क्यों मेरा जीना दुश्वार कर रहे


उत्तराखंड !! हाँ ये देव भूमि है
मैंने सैकड़ो देवी देवताओं को
अपने में है  स्थान दिया
शांति पहाड़ो का आचरण है
शोर से तुमने खलल डाला है
हे मानव !! तुम्हारे स्वार्थ ने
मुझे आज फिर छलनी किया
बना कर पाप का भोगी मुझे
देवी - देवताओ को रुष्ट किया
नदियों के प्रवाह से खेलना महंगा पड़ा
कई गाँव, घर और जानो को समां दिया  

ना चाहते हुए भी, कई बार तुम्हे
तुम्हारी गलती का अहसास कराया था
तुमने न सबक लिया न कोई प्रयास किया
बार बार फिर वही काम और बेहिसाब  किया
दुःख है मुझे कि तुम्हे इस बार सबक सिखाने
निर्दोष भी, भक्त भी मेरे गुस्से का शिकार हुए
शायद यह नुकसान तुम्हे याद दिलाता रहे
और तुम खुद को  और मुझे अब जीने दोगे.....




प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 

शनिवार, 22 जून 2013

बाबा विनती तुझसे ....



बाबा इस कहर में भी, तेरा अस्तित्व आज यूं ही कायम है
जता दिया तूने आज भगवान और इंसान में अंतर क्या है
गलती जिसने भी की, दंड उसका तूने सबको दे ही दिया है
ली तूने बलि हजारो की, तेरे सिवाय वहां अब बचा क्या है

मंदाकनी के क्रुध प्रवाह को रोक तूने खुद को बचा लिया
खुद के मान सम्मान को तूने हमारी श्रद्दा से तोल दिया
कुछ को दी जिंदगी, कुछ को तूने अपनों से छीन लिया
लाखो करोडो भक्तो का तूने, श्रद्धा-विश्वास हिला दिया

श्रद्धा में शायद कमी हुई, दिखावा क्योंकि अब ज्यादा है
पवित्र स्थलों में प्रदूषण और चोर बाजारी अब ज्यादा है
प्रकृति व् पर्यायवरण को रख ताक, तेरा नाम भुनाया है
जंगल नदियों से खिलवाड़ का सबको सबक सिखाया है

अब रहम करना और इस कहर से तू सबको बचा लेना
हुई जो गलतियाँ हमसे, सुधार उन्हें तू रास्ता दिखा देना
प्रकृति व् भगवान का रिश्ता समझे अब तू शरण में लेना
अब रूठना नहीं यूं , हर विपदा से बाबा तू हमें बचा लेना

- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 

शुक्रवार, 14 जून 2013

ताजा खबर - आम आदमी



मोदी की जय जयकार से आडवाणी जी को चढा बुखार
नितीश को लगा झटका, न सुनी भाजपा ने उसकी पुकार
मोदी है वो कदम जो सत्ता तक ले जाये, ये हुआ संचार
सोचा गठ बंधन में पहले मजबूत करे हम अपना आधार

मान गए थोड़ा आडवाणी, भाजपा को कुछ राहत हुई
मान मनोवल से मना लिया, पर साख कुछ आहत हुई
जदयू ने कुछ गणित किया, तेवर दिखलाने शुरू किए
देश की नही सोच अभी भी, विपक्ष को सबने शस्त्र दिए

अल्पसंख्यंक के नाम पर संप्रदायिकया को भुनाते हैं सब
इतने वर्षो में अल्पसंख्यंकों का उद्दार किस ने किया कब
वोट बैंक है गरीब और अल्पसंख्यंक, इंका भला होगा कब
इसे भुनाने और जीतने की खातिर ख्याल आता है जब तब

साख लिपटी घोटालो मे, मुंह काला किया कोयले की दलाली मे
सीना चौड़ा, मुंह मे कडवे बोल, हुये बेशर्म राजनीति के खेल मे
भाजपा का भी कांग्रेसी करण हुआ आज निजी स्वार्थ के क्षेत्र मे
देश की सोच कहीं पीछे छूटी, लड़ते हैं अपना अस्तित्व बचाने में

मैं आम आदमी, रोटी कपड़ा और मकान के लिए करता काम
सोच रहा हूँ किस दिन कोई नेता, दिल से लेगा हमारा नाम
एमएलए/एमपी का फंड मिलता उन्हे, कब करेंगे हमारे नाम
वोट देते एक आस में, मिले रहने को छत, भूख मिटे सुबह शाम

- प्रतिबिंब बड़थ्वाल 

गुरुवार, 6 जून 2013

डॉ माधुरी बड़थ्वाल और लोक संगीत - एक परिचय

डॉ माधुरी बड़थ्वाल और लोक संगीत - एक परिचय 



ज मुझे आप मित्रो से डॉ माधुरी बड़थ्वाल का परिचय करवाते हुये हर्ष हो रहा है।

ढाई वर्ष की उम्र से संगीत, सुरों और नृत्य से प्रेम करनी वाली छोटी बालिका आज किसी परिचय की मोहताज तो नही लेकिन मेरा प्रयास इस नाम को उन सब लोगो तक पहुँचाने का है जो इस व्यक्तित्व से परिचित नही थे मेरी तरह।

डॉ. माधुरी बड़थ्वाल जी ( जन्म 19 मार्च 1953 ) आल इंडिया रेडियो की प्रथम महिला म्यूज़िक कम्पोजर है। उन्होने बड़े पैमाने पर उत्तराखंड के लोक संगीत (गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी) के प्रचार, पलेखन और सरंक्षण के लिए पिछले 45 सालो से निरंतर कार्य किया है। उन्होने इसके लिए बड़ी मात्रा मे भ्रमण कर उत्तराखंड के हर उम्र के कलाकारो को पहचाना। सैकड़ो विद्यार्थियो को उन्होने सिखाया भी और निर्देशित भी किया। उन्होने उत्तराखंड के दुर्लभ वाद्य यंत्रो को दस्तावेज़ के रूप मे सँजोया भी है और उन्होने परम्पराओ को अपनी सोच के साथ सहेजने का प्रयास किया है। उन्होने लोक संगीत के साथ भारतीय शास्त्रीय संगीत को मिश्रित किया है। डॉ माधुरी ने उत्तराखंड के कई पुराने और अंजान कलाकारों जैसे जमुना देवी, भगीरथी देवी, बसन्ती देवी को भी रिकोर्ड किया है
लोकगायक चन्द्र सिंह राही के साथ           व्      पारंपरिक वेश भूषा मे डॉ माधुरी बड़थ्वाल 

५ साल की उम्र मे ताऊ जी की कही बात को दिल पर लेकर, उनके द्वारा दिये गए एक आने को वहीं रखकर, परिश्रम को हथियार बनाकर ज़िंदगी मे आगे बढ़ने की सोच और भाई बहनो को पढ़ाई के लिए प्रेरित करना उन्होने मकसद बना लिया। प्रकृति के सुरमय सहज व अनुशासित नगर लैन्सडाउन मे अपनी शिक्षा की शुरुआत की। पिता श्री चंद्रमणि उनियाल [गायक व सितारवादक भी] ने समाज की विपरीत टिप्पणियॉ को नज़र अंदाज करते हुये प्रयाग संगीत समिति मे विधिवत संगीत की शिक्षा दिलाई। डॉ माधुरी ने हाई स्कूल करते ही अपनी मेहनत के बलबूते संगीत प्रभाकर की डिग्री हासिल कर ली और फिर  अपने ही विद्यालय राजकीय इंटर कालेज लैंसडाउन मे संगीत अध्यापिका के पद पर कार्य किया। प्रथम गुरु श्री गणेश केलकर, गुरु श्री ज्वाला प्रसाद गुरु श्री मकसूद हुसेन [सारंगी वादक] से संगीत और राग रागिनियों की बारीकियों का अध्ययन किया। उन्नति के मार्ग पर अग्रसर माधुरी जी को आकाशवाणी नजीबाबाद मे प्रथम महिला म्यूज़िक कम्पोजर [ तत्कालीन केंद्र निदेशक श्री एस के शर्मा के अनुसार ] के रूप मे अखिल भारतीय स्तर पर पहचान मिली। इस दौरान माधुरी जी ने सैकड़ो संगीत, नाटको और रूपको का कुशल निर्देशन, लेख्न और निर्माण किया। नानी जी, ताई जी व माता जी से के साथ कई बुज़र्गों के द्वारा गढ़वाली भाषा [मुहावरे, लोकोक्तियाँ, लोकगीतो लोक गाथाओ व कथाओं ] का गूढ ज्ञान विरासत रूप मे प्राप्त किया और वही हिन्दी मे स्नातकोर करने के साथ ही संगीत और साहित्य का अनूठा रिश्ता बनाता चला गया। ।

डॉ मनु राज शर्मा व् डॉ माधुरी बड़थ्वाल 

पति डॉ मनुराज शर्मा [ जो संगीत के मर्मज्ञ थे] की प्रेरणा से शोध कार्य [उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर] मे स्वयं को तल्लीन कर और पांडुलिप्पी तैयार की।  नजीबाबाद से प्रसारित धारावाहिक 'धरोहर' का सृजनात्मक प्रसारण किया जिसमे उनके द्वारा संग्रहित धरोहर का उपयोग हुआ और पुनमूर्ल्याकन भी हुआ। इसी बीच ३ अक्तूबर २००३ मे डॉ मनुराज ने माधुरी जी का साथ छोड़ परलोक सिधार गए। कठिनतम और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद, पति की मृयु के तीन बाद ही स्टुडियो मे बैठ 'धरोहर' का निर्माण किया - डॉ मनुराज का स्नेह और उनकी प्रेरणा ने ही उनमे यह आत्मविश्वास बनाए रखा। परिवार मे ज्येष्ठ सतीश चंद्र बड़थ्वाल जेठानी चन्द्रकला बड़थ्वाल व भतीजी नीरा बड़थ्वाल ने इस वक्त पर उन्हे और परिवार को मनोबल दिया। अपने शोध कार्य के लिए उन्हे बहुत लोगो का साथ मिला जिसमे उनके परिवार के सदस्य ससुर श्री संतन बड़थ्वाल [पूर्व विधायक], पुत्री येन्नी मदालसा, पुत्र मानस मनु और मानवेन्द्र मनु का योगदान सराहनीय है


अब डॉ माधुरी बड़थ्वाल संगीत को अपनी संस्था ' मनु लोक सांस्कृतिक धरोहर संवर्धन संस्थान'  के माध्यम से सँजोये रखने के प्रयास मे कार्यरत है समर्पित है । डॉ माधुरी लोक संगीत पर शोध करने वाले देश और विदेशो के शोध विद्यार्थियों का मार्ग दर्शन करती है। संस्कृति विभाग में लोक कलाकारों को सूचीबद्ध करने में डॉ माधुरी ने निर्णायक भूमिका निभाई। आज भी उन्हें आल इण्डिया रेडियो या उत्तराखंड के कई आयोजनों को मुख्य अतिथि के रूप में निवेदन किया जाता है निमंत्रित किया जाता है। नारी सशक्तिकरणके लिए उनके प्रयास व् कार्य सराहनीय है।


उत्तराखंड के संगीत व लोक संगीत की धरोहर के लिए कार्यरत डॉ माधुरी बड़थ्वाल जी को कोटि कोटि प्रणाम और हमारी शुभकामनायें।
उत्तराखंड के सुर सम्राट नरेंद्र सिंह नेगी जी के साथ [ फोटो सौजन्य डॉ माधुरी बड़थ्वाल]

चलते चलते सुनिए सुर सम्राट नरेंद्र सिंह नेगी जी के साथ गाया डॉ माधुरी जी का ये गीत 'स्याली बसंती'



प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल

बुधवार, 1 मई 2013

मजदूरी मेरा हक़




अपने पेट की खातिर, तुम हम पर आश्रित हो
हमारा पेट काटकर तुम लाखो करोडो कमाते हो
हमारी आवाज़ को हर बार अनुसना कर जाते हो  
सोचो हमारे खून पसीने का क्या मोल लगाते हो 

सरकार हो या जनता उपेक्षा हमारी करती है 
चर्चा हमारी कर लेकिन नाम अपना करती है 
हर संस्था अपने लिए हमारा प्रयोग करती है 
पैसो के बल पर हमारा ही वो शोषण करती है  

भले मजदूर दिवस पर एक शब्द न कहना 
भले मजदूर दिवस पर एक चित्र न लगाना 
भले मजदूर दिवस पर एक दुआ न करना 
बस मजदूरी मेरा हक़ तुम समय पर दे देना 

- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 



रविवार, 10 मार्च 2013

बम बम भोले



(महाशिवरात्रि पर सभी मित्रो को बधाई एवं शुभकामनाएं)

शिव के हर रंग  निराले, बोलो बम बम भोले 
भभूत का ये लेप लगाते, बोलो बम बम भोले 

तन नीला नीलाम्बर कहलाते, बोलो बम बम भोले 
रुद्राक्ष और नाग इनके आभूषण, बोलो बम बम भोले 

डमरू, त्रिशूल, नंदी इनके साथी, बोलो बम बम भोले
तीसरी आँख से शत्रु  हैं डर जाते, बोलो बम बम भोले

कालो के काल ये बन जाते, बोलो बम बम भोले 
दुखियो की ढाल ये बन जाते, बोलो बम बम भोले 

गंगा इनकी जटाओ से बहती, बोलो बम बम भोले 
माँ पार्वती संग इनके ही रहती, बोलो बम बम भोले

अमृत कर दान विष खुद पी जाते, बोलो बम बम भोले 
ब्रह्मा, विष्णु संग सृष्टी के सरंक्षक, बोलो बम बम भोले 

रूद्र रूप में तांडव नृत्य करते, बोलो बम बम भोले
रावण राम जैसे भक्त है इनके, बोलो बम बम भोले

- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 

गुरुवार, 21 फ़रवरी 2013

याद





मन में उभरते भाव
छेड़ देते है कोई घाव
किया जिससे किनारा
वही उस पल का सहारा

भूले बिसरे गीत जो बने
गुनगुना लेते है कभी उन्हें
नए बोल नए सुर से सजा
जीने का बहाना ढूंढ लेते है

बीता पल बिछड़ जाता है
आज से फिर मिल जाता है
कल के सुख की खातिर
आज को जीना भी जरुरी है

भूल जाते है लोग जिन्हें
याद करते है केवल उन्हें
जो साथ है हर पल 'प्रतिबिंब'
क्यों करे फिर याद उन्हें

- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल

गुरुवार, 14 फ़रवरी 2013

~ उधेड़बुन ~




उधेड़बुन
न जाने कितने
फटे पुराने विचारो को
फिर से अपनाना चाहती है

सुई रूपी हौसले से
आस रुपी धागे का
अस्तित्व को बचाने
एक जाल बनता जाता है  

अपने ही लोगो में
अपनी पुरानी तस्वीर दिखाता
अपने अस्तित्व का ऐलान करता 
अब भीड़ से अलग दिखता हूँ

जिंदगी की दौड़ में
नए ज़माने के दौर में
पुराना कब तक सहेज सकूंगा
उधेड़बुन अब भी ज्यों की त्यों है

-प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 

शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2013

नसीब




नसीब अपना - अपना 
आप हकीकत हम सपना 
आपके माई बाप, हम अनाथ
आपके महल, हमारा फुटपाथ

न भूख सहने को रोटी है 
न तन ढकने को वस्त्र है 
न कोई सुध हमारी लेता है 
न कोई अब हमें अपनाता है 

मिल जाये खाने को तो खा लेते है 
न मिले तो कहीं भूखे पेट सो लेते है 
मेरे सपनो को बस आँख मूँद देख लेता हूँ 
रहने को जमी और छत आसमा बन जाता है 

मैं चर्चा का विषय हर मंच पर बन जाता हूँ 
तस्वीरे दिखाते आप मैं सहानूभूति बन जाता हूँ 
क्या नेता, अब तो जनता भी हमें भुनाना जानती है 
हकीकत से दूर लेखो तस्वीरो में वाह वाह लूट ले जाते है 

आप तो पीते बोतल का पानी, हम गंदा पी, जी लेते है 
आपकी फेंकी बोतल से भी चप्पल का जुगाड़ कर लेते है 
महंगे रेस्टोरेंट में खाकर आप, 'टिप्स' खूब वहाँ दे कर आते है 
हमने फैलाये हाथ तो कर्म करने की आप नसीहत हमे दे जाते है 

- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 


(यह चित्र https://www.facebook.com/groups/tasvirkyabole/ "तस्वीर क्या बोले" समूह में पेश किया था  जिसे  पुन: ब्लॉग तस्वीर क्या बोले में भी प्रेषित किया गया था )



रविवार, 27 जनवरी 2013

कर्म




हवाए सर्द है 
प्रेम का मौसम गर्म है 
ठिठुर रहा तन 
दिल में छिपाये मर्म है 
आशिकों के शहर में 
मुस्कान में छिपा दर्द है  
मोहब्बत सिखाये धर्म 
फिर भी मन में छिपाये गर्द है 
अपराध होते आम 
घिनौनी मानसिकता देख आती शर्म है 
'प्रतिबिम्ब' जानता इतना 
इंसान की पहचान केवल उसका कर्म है 

मंगलवार, 8 जनवरी 2013

प्रेम में ......




प्रेम में भावो का
और
भावो में शब्दों का
गहरा नाता है

प्रेम में स्नेह का
और
स्नेह में आदर का
गहरा नाता है

प्रेम में समर्पण का
और
समर्पण में निष्ठा का
गहरा नाता है

प्रेम में गीत का
और
गीत में संगीत का
गहरा नाता है

प्रेम में साथ का
और
साथ में हाथ का
गहरा नाता है

प्रेम में खोने का
और
खोने में पाने का
गहरा नाता है

प्रेम में जिज्ञासा का
और
जिज्ञासा में ज्ञान का
गहरा नाता है

प्रेम में रूठने का
और
रूठने में मनाने का
गहरा नाता है

प्रेम में दोस्ती का
और
दोस्ती में विश्वास का
गहरा नाता है

प्रेम में रिश्ते का
और
रिश्ते में सम्मान का
गहरा नाता है

प्रेम में फूल का
और
फूल में खुशबू का
गहरा नाता है

प्रेम में वफ़ा का
और
वफ़ा में सच्चाई का
गहरा नाता है

प्रेम में प्यास का
और
प्यास में गहराई का
गहरा नाता है

प्रेम में आंखों का
और
आंखों में आँसू का
गहरा नाता है

प्रेम में मन का
और
मन में तस्वीर का
गहरा नाता है

प्रेम में ख़्वाब का
और
ख़्वाब में अहसास का
गहरा नाता है

प्रेम में दूरी का
और
दूरी में जुदाई का
गहरा नाता है

प्रेम में बातों का
और
बातो में प्रेम का
गहरा नाता है

- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल

मंगलवार, 1 जनवरी 2013

चलो बदल जाये



कल आज मे बदल गया
तारीख व साल बदल गया
तारीख तो अब रोज बदलेगी
ये साल भी हर साल बदलेगा
अब सवाल है हम कब बदलेंगे ?
चलो आज सवाल खुद से पूछ ले।
मान सम्मान सबका क्या कर पाएंगे ?
कुरीतियों को क्या हम बदल पाएंगे ?
विकृत मानसिकता को कैसे बदल पाएंगे ?
लड़का - लड़की का भेद क्या हम मिटा पाएंगे ?
इंसानियत जो भूल चुके क्या उसे फिर से पाएंगे ?
संस्कार संस्कृति को क्या घर मे फिर ला पाएंगे ?
नारी को घर मे नही बाहर भी क्या सुरक्षा दे पाएंगे?
स्वार्थ को भुला क्या हम एक दूजे को गले लगा पाएंगे ?
धर्म जाति रुतबे  के बिना क्या मानवता को पहचान पाएंगे?
अगर आप का उत्तर किसी भी बात पर हाँ है तो अवश्य हम बदल पाएंगे ..........

- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल
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