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शनिवार, 14 सितंबर 2013

मेरा प्रेम


अनदेखा कैसे कर दूं
प्रेम अपना कैसे छिपाऊँ
तुम्हे बचपन से देखा है
तुम्हे ही मन में सोचा है
तुम मधुर, सुन्दर दिखती हो
हाँ हर रूप में अपनी लगती हो
तुम मेरा गौरव हो
तुम मेरी पहचान हो

मेरे जीवन पर
तुम्हारा ही प्रभाव है
हाँ अन्य को देखा
पढ़ा सुना जाना पहचाना
लेकिन तुम से प्रेम था
तुम से प्रेम है, और
तुम से प्रेम बना रहेगा

मैं चाहता हूँ
बाकी भी तुमसे यूं प्रेम करे
मुझसे भी ज्यादा करे
तुम इस प्रेम की हक़दार हो
हर भारतीय तुम से प्रेम करे
तुम्हे मान दे सम्मान दे

तुझे जिसने भी
अपना बनाया
अपने लेखो में
अपनी कविताओ में
अपने उपन्यासों में
अपने निबंधो में
अपने शोध में
वे सभी आज
तुझसे ही पहचाने जाते है
हाँ हम उनका सम्मानकरते है
चाहता हूँ सभी सम्मान करे
उन्हें याद रखे और
तुझे अपना कर प्रेम करे  

हिन्दी!!!
हाँ मैं तुमसे
प्रेम करता हूँ
और करता रहूँगा
तेरे सम्मान के लिए
अपना योगदान देता रहूँगा ...

- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 

1 टिप्पणी:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " प्रेम से बचा ना कोई " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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