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बुधवार, 24 फ़रवरी 2016

एक प्रेम निवेदन ....




पल पल तेरी तस्वीर, आँखों में उभरती है
साँसों में महक बनकर, तू ही उभरती है
मेरे एहसासों में तू, रोज बनती संवरती है
बनकर जान मेरी, तू ही दिल में धडकती है

चाह दो पल की, एक पल जिया जाता नहीं
आदत साथ चलने की, अकेले चला जाता नहीं
यार जान ले, गया वक्त हाथ कभी आता नहीं
टूट कर चाहने वाला, मिलता अब कहीं नहीं

मैं एक प्रेम पुजारी सा, द्वारे तेरे रोज खड़ा
हक़ से ही मांग रहा, बस वक्त तुझसे थोडा
चाह छोटी है मेरी, तू कर दिल अपना बड़ा   
दे भिक्षा में ही, दिल पर कर उपकार थोडा 

मोहब्बत के किस्से, लोगो के बहुत सुने है
वो जीते थे कैसे प्रेम, लोगो से किस्से सुने है  
सबसे अलग हो प्रेम हमारा, ख्वाब मैंने बुने है
बीते कुछ पल तुझ संग, वो लम्हे ख़ास चुने है   


-    प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल २४/२/२०१६ 

1 टिप्पणी:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " परमार्थ से बड़ा सुख नहीं - ब्लॉग बुलेटिन " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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