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मंगलवार, 5 अप्रैल 2016

आ.....




छोड़ पुरानी बात सारी, आ फिर से नई शुरुआत करें
मोहब्बत थी जो दरमियाँ, आ उसे पुन: स्थापित करें
 
माना गलती किसी की, आ उस त्रुटि को हम क्षमा करें
जो मार्ग हम भटक गये, आ उसका भी परिशोधन करें

जो था अनुचित, आ उसे उचित राह हम प्रदान करें
विश्वास का जो बुझा दिया, आ उसे पुन: प्रज्वलित करें

छाये हैं खामोशी के बादल जो, आ उन्हें हम दूर करें
चलना हमे प्रेम संग, आ उस एहसास का आभास करें

मुरझा गए थे जो एहसास, आ उन्हें फिर सजीव करें
बाकी रह गए जो अरमान, आ उन्हें हम लक्षित करें

बिछड़ कर पाया जो दर्द, आ उसका हम उपचार करें
बन जाये हम मिसाल, आ ऐसा एक दूजे को प्यार करें

चाह तन मन बसने की, आ वो भाव फिर संगठित करें
प्यार एक दूजे का बनकर, आ हम प्रेम का श्रीगणेश करें 


-    प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल

सोमवार, 4 अप्रैल 2016

तेरा नाम




तेरा नाम ही मन को झंकृत करता है
एहसास में ही तन मन झूम उठता है

कहाँ छोडू एहसास, बैचेनी और इंतजार
पल पल याद करता है तुम्हे मेरा प्यार

बंधक हूँ तेरी सांसो का, तेरी महक का
क्या मिलेगा मुझे, उपहार मेरे प्यार का

प्यार में रचा-बसा, रोम-रोम तन मन का
आस है जिंदा, भरोसा मुझे मेरे प्यार का
 
जब जब दूर हुई, तब दिल बहुत तडपा है
लौटने तक ये, आख़िरी सांस सा अटका है

मिलते ही गिला न, कोई शिकवा रहता है
मन प्रफुल्लित, तन सुगन्धित सा लगता है

सिखाई प्रेम की भाषा, उस में ही बात करो
रह जाता जो अनकहा सा, तुम उसे पूरा करो

सुनो, तुम्हारे हाथो में है अब मोहब्बत मेरी 
प्यार को प्यार करो तुम, यही है आरजू मेरी


प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल ४/४/२०१६
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