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मंगलवार, 26 मई 2015

मोदी @३६५




मोदी के ३६५ दिनों को लोग [ चैनल - सबके अपने अपने पैनललिस्ट और जो शुरू से ही मोदी विरोधी रहे अधिक ] देख रहे है केवल टीवी चैनलों पर या अखबारों के जरिये या पोल सर्वे द्वारा. आंकड़ो के फेर में मैं नही पड़ता लेकिन जो मैंने पाया एक भारतीय होने के नाते

* राज्य सभा में १०१ % कार्य
* लोकसभा में १२३% कार्य
[ संसद में पिछले १५ साल में सबसे अधिक काम ]
* १ साल में ४७ बिल पास [ इन बिलों की लोग मिडिया चर्चा नही करता केवल ३ बिल जिसमे राज्यसभा में राजनितिक कारणों से सफलता न मिलना लेकिन अब सेलेक्ट कमेटी में भेजा गया]

* १७ बड़ी योजनाओ की शुरुआत [स्वच्छ भारत अभियान, जनधन योजना, नमामी गंगे, डिजिटल इण्डिया, मेक इन इण्डिया, श्रेमेव जयते, बेटी बचाओ बेटी पढाओ, बीमा योजना, पेंशन योजना, सिंचाई योजना, स्वाइल हेल्थ कार्ड, मुद्रा बैंक, आज ही २४ घंटे किसान चैनल की शुरआत..  ऐसी ही कई  योजनाये ] ..... क्या इन योजनाओ से आने वाले  समय में लाभ होगा  या नही .ये किसके लिए है .. सोचिये  मित्रो

* १८ देशो का दौरा [ योग दिवस के लिए १७७ देशो का समर्थन, पूंजी निवेश की संभावनाए, मेक इन इण्डिया जैसी सोच के लिए देशो को, उनकी कम्पनियों को प्रेरित करना, कूटनीति के लिहाज से देशो का दौरा, पड़ोसियों को फिर से भरोसा देना जिसमे चीन की भागेदारी बढ़ रही थी, सभी देशो द्वारा भारत को सम्मान देना - विश्व गुरु बनने की दौड़ में प्रयासरत मोदी, हर देश में भारतीय संस्कृति और संस्कार की छाप छोड़ना ]

* रेल, सुरक्षा और रक्षा के  क्षेत्र में साहसिक कदम. [ अन्य क्षेत्रो में भी कार्य हुए है जैसे संचार, शिक्षा आदि महकमो में ]

* केवल नेहरू गांधी ही नही देश में अन्य नेता भी हुए है, उन्हें सम्मान देने का दिल से कार्य शुरू हुआ है

* काले धन पर काम
- एस आई टी गठित
- दो महीने का समय दिया है काले धन वालो को कि टैक्स पे करो वरना जुर्माना तो लगेगा ही,
- जाँच होगी और १० साल तक सजा का प्रवधान,
- बैंक खाते वाले देशो के साथ संधि के दिशा में प्रयास... कुछ के नाम सार्वजनिक हुए .. आज भी ५ लोगो के नाम सिवस बैंक ने जारी किये. पिछली सरकार ने जो स्थिति बनाई है काले धन पर उसके नियमो के कारण उसमे समय तो लगेगा ही.

मुझे पसंद आया  सरकार का
१. स्पीड - एक्शन मोड [ प्रधानमंत्री का ओवारएक्टिव होना  इसका विशेष कारण रहा ]
२. देशो में प्रभुत्व व् कूटनीति विदेश नीति  के तहत - नेपाल में सहायता हो. चाहे यमन, श्रीलंका, ईराक और अफगानिस्तान से भारतीयों को सुरक्षित वापिस
३. कुछ ख़ास कार्यो में सीमा तय करना ... जैसे २०२२ तक सबको घर देना [ बिजली पानी की समस्या से निजाद के साथ ], स्वछता अभियान - जिसका सीधा प्रभाव लोगो के जीवन पर, स्वास्थ्य पर, टूरिज्म पर, रोजगार पर  .... अधिकतर योजनाये सीधे गरीब के हित में है
४. पारदर्शिता के साथ कार्य , भ्रष्टाचार पर लगाम अभी तक

अवश्य ही आने वाले समय में ये योजनाये, नीतिया और मोदी जी का नेतृत्व विकास की नई ऊंचाईया को छुएगा. महंगाई बेरोजगारी जैसी चुनोतियो का सामना करना ही होगा लेकिन मोदी जी की सोच, उनका विश्वास और १२५ करोड़ जनता का प्यार उन्हें अपने कार्य के बल पर सभी चुनौतियों का सामना करंने में सहायक होगा.

मुझे अपनी उम्मीद से उम्मीदे है ... आशा और विश्वास है एक भारतीय होने के नाते - जय हिन्द

प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल, शारजाह , यूएई 

गुरुवार, 21 मई 2015

शब्द मेरी पहचान



एक समूह में कुछ पंक्तिया लिखी थी फिर मित्रो के कहने पर इसमें विस्तार किया 



शब्द मेरी पूंजी, शब्द मेरा व्यापार
शब्द मेरी प्रतिज्ञा, शब्द मेरी पतवार
शब्द ही भक्ति और शब्द ही सदाचार 
शब्द ही सत्कार और शब्द ही संस्कार

शब्द मेरा सम्मान, शब्द मेरा हथियार 
शब्द मेरा विश्वास, शब्द मेरा व्यवहार
शब्द ही परामर्श और शब्द ही बहिष्कार 
शब्द ही अनुभूति और शब्द ही अलंकार

शब्द मेंरे पाप-पुण्य, शब्द मेरे हरिद्वार 
शब्द मेरे हार-जीत, शब्द मेरे पुरुस्कार
शब्द ही ब्रह्म और शब्द ही विस्तार
शब्द ही विनम्रता और शब्द ही अहंकार

शब्द मेरी मर्यादा, शब्द मेरा गरूर 
शब्द मेरी आत्मा, शब्द मेरा प्यार 
शब्द ही 'प्रतिबिंब', शब्द ही संसार 
शब्द ही औषधि और शब्द ही प्रहार

मंगलवार, 5 मई 2015

कुछ तो बात है....


तेरी तस्वीर से जब मुलाकात होती है 
मेरे गीतों में लिपटी इश्क की बंदिश लगती है 
थिरकती मुस्कान लेकिन होंठो की तपिश लगती है 
तन मन से उभरी अधूरी ख्वाइश सी लगती है

मचल रहे अहसास जैसे मर्यादा तोड़ रहे है 
हरियाली इश्क की जैसे तुझे मुझसे जोड़ रही है 
कुछ तो बात है तस्वीर में जो हवा का रुख मोड़ रही है 
आगोश में सिमटे है जज्बात, हार जीत की होड़ मची है

- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 



मंगलवार, 28 अप्रैल 2015

बेखबर अल्फाज़




सूर्य उदय या
सूर्य हुआ अस्त
तस्वीर का रुख
समझ न पाया

लड़खड़ाते से भाव
पनाह ढूँढते है
अक्षर प्रेम के
बिखरे पड़े है

हवा गमो की
आँधी बन आई है
मौसम बेईमान हुआ
पत्ता पत्ता टूटा है

रात दिन एक सा
अंधकार का कहर है
करवट बदलता वक्त
नाराज़ हर पहर है

थमी थमी सी साँसे
बेखबर है अल्फाज़
दुनियां बेसुध 'प्रतिबिंब'
दफन हुए झूठे अहसास

रविवार, 12 अप्रैल 2015

रात बात करती है .....




तू कौन है, जानता नही मन भ्रमित है
तू मौन है, लेकिन मेरा मन विचलित है
तेरे शब्दों के सफर में भाव विस्मित है
अहसासों की तपिश में मन संकुचित है

एक कोमल काया, मायावी जान पड़ती है
एक बेसुध छाया, साथ साथ चल पड़ती है
दौड़ने की चाह, लेकिन साँसे रुक पड़ती है
अहसास ढूँढते छाँव, आह निकल पड़ती है

मेरी तन्हाई, न जाने किस से बात करती है
मेरी तमन्ना, फिर मदहोशी की बात करती है
आस 'प्रतिबिंब',अब खुशियों की बात करती है
कह चुकी शाम बहुत, अब रात बात करती है


-प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल

सोमवार, 6 अप्रैल 2015

सुनो ! एक बार कह दो



सुनो ! एक बार कह दो
तुम्हे मेरी अब जरुरत नही
तुम्हारे जीवन में अब मेरा स्थान नही
तुम मेरी हो यह दिखाने की जरुरत नही


सुनो ! एक बार कह दो
तुम्हे मेरी अब जरुरत नही
तुम्हारी जिन्दगी से मैं चला जाऊंगा
जैसे आया था, उसी वीराने मै लौट जाऊंगा

सुनो ! एक बार कह दो
तुम्हे मेरी अब जरुरत नही
केवल तुम्हे याद कर मैं जिन्दा रह लूँगा
तुम खुश हो ये जानकार मैं खुश रह लूँगा

सुनो ! एक बार कह दो
तुम्हे मेरी अब जरुरत नही
मैं अपना प्यार और आँसू छुपा लूँगा
तुम मेरा प्यार हो, खुद से झूठ बोलना सिखा दूंगा 

सुनो ! एक बार कह दो
तुम्हे मेरी अब जरुरत नही
मुझे तुम्हारी परवाह नही, यह सच मैं छुपा लूँगा
तुम किसी और से प्यार करती हो, ये दर्द छुपा लूँगा

सुनो ! एक बार कह दो
तुम्हे मेरी अब जरुरत नही
तुम्हे किसी और की बाँहों में देख, मुँह मोड़ लूँगा
तुम अतीत हो मेरा, ज़माने से ये बात छुपा लूँगा

सुनो ! एक बार कह दो
तुम्हे मेरी अब जरुरत नही
अहसासों संग जी लूँगा, तुम्हे न कोई परेशानी होगी
चला जाऊंगा दूर, तुम्हे न पास होने का अंदेशा होगा

सुनो ! अब मैं जा रहा हूँ
जानता हूँ तुम्हे मेरी अब जरुरत नही
तुम्हारे लिए दुआओ का सिलसिला जारी रहेगा
जिस जहाँ में भी रहूँ बंद आँखों से देखता रहूँगा  

प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 

मंगलवार, 31 मार्च 2015

कल [ बीता कल ]




गुजर रहा था मैं कल
गुजरे हुए रास्तो की तलाश में
देखा मील के पत्थर अडिग खड़े
अभी भी मंजिल की ओर इशारा कर रहे  
कण कण राहो का मुस्करा रहा था
शायद मुझे देख उसे कुछ याद आ रहा था
अनगिनत चेहरों में मुझे तलाश रहा था  
कभी हंस देते वो पेड़ो के झुरमुट
मुझे देख अचंभित थी वादियाँ
शोर कर रही थी सुप्त नदियाँ
एक साथ सब पूछने लगे
क्यों लौट आये हो, क्यों लौट आये हो
जो जाता है वो आता कहाँ है
बिछड़ो को कोई याद करता कहाँ है
हैरान है परेशान है क्यों लौट आये हो

मन हुआ रुक जाऊं कुछ देर यहाँ
बीता था मेरा हर एक पल जहाँ
लिपट कर रो दूँ राह के हर साथी से
भिगो लू मन मेरा मिलकर अपनों से  
लेकिन लौट चला यह सोचकर  
कि मेरा संसार अब यहाँ है कहाँ
इन सबसे मैं तो आगे निकल आया हूँ
इन सब को इनके हाल पर छोड़ आया हूँ  
अपने सुखद कल के लिए ‘प्रतिबिंब’
इस कल से रिश्ता तोड़ आया हूँ, रिश्ता तोड़ आया हूँ


शनिवार, 28 मार्च 2015

~ नई शुरआत ~



थोडा सा सुकून है.
भीड़ भाड कम है
अब शोर भी कम है
जिसे सुनना चाह रहा
उसकी आवाज़ साफ़ है 
आभासी सड़क पर
अब आवाजाही कम है
कुछ की नाक लम्बी
कुछ की साख ऊँची
कुछ ने हक़ जताया
कुछ ने लकीर खींची
विराम के निर्णय से
कुछ ने राहत पाई होगी
कुछ  सोच रहे  होंगे
जान बची तो लाखो पाए
कहीं अब भी असमंजस है
कहीं पैदा हुआ संशय है 
कही गाँठ खुलने लगी
कहीं गाँठ पड़ने लगी
कुछ अपने जुड़े 'प्रतिबिंब'
कुछ का अब भी इंतज़ार है
फिर से नई एक शुरुआत है

देखेंगे नए सफ़र में क्या खास है   

शुक्रवार, 20 मार्च 2015

~खामोश ज़ज्बात ~




हालात मेरे पक्ष में आज भी नही 
वक्त की अपनी हर चाल सही 
उसे समझने की समझ मुझे नही 
महसूस हुई जो बात वही कही

चुपचाप चलना सीख  लिया 
खामोश उतर देना सीख लिया  
अहसासो से मुंह मोड़ना सीख लिया 
देखो हमने भी वक्त से ये सीख लिया 

महफ़िल में भी अकेले होने लगे 
न चाह कर भी मुस्कारने लगे 
दूरियों को भी हम झुठलाने लगे
इश्क की झूठी कसम खाने लगे   

कसमे वादे भी अब मुंह मोड़ रहे 
खामोश ज़ज्बात भी दम तोड़ रहे 
वक्त के नतीजो पर 'प्रतिबिम्ब' 
हम बेमतलब के अक्षर जोड़ रहे 

शनिवार, 7 मार्च 2015

उस रंग से इस रंग तक .....



तुम्हारे चेहरे पर  
न जाने कितने रंग अब तक
परते बिछाए चिपके थे
न जाने कब
किस किस ने रंग दिया
न जाने कब
किस रंग ने आकर्षित किया

रंगों का काम ही है
आँखों को सुकून देना और
अपने प्रति आकर्षण पैदा करना
कभी ये रंग कभी वो रंग
इन्द्रधनुष से बनकर
आँखों को गुमराह करते है  

हो गई होली
खेल ली रंगों से होली
आखिर ये रंग उतरने ही है
आज नही तो कल  
रंगों का खेल हो चुका अब
असली चेहरा दिखने लगा होगा
देख लीजिए खुलकर ‘प्रतिबिम्ब’ अपना
प्यार का रंग केवल यहीं नज़र आएगा
हाँ ये रंग बिलकुल पक्का है
मन से पूछना बिलकुल सच्चा है
सोच कर देखना
तन मन खुद ही गुलाबी हो जाएगा
शरमा मत जाना

अहसासों के मिलन तक छिपाए रखना   
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