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गुरुवार, 26 नवंबर 2009

26/11 - क्या सीख पाये हम कुछ ?


मुंबई हमले की आज बरसी है. तमाम चैनलो और प्रिंट मीडिया में "अपने सच" की खूब बिक्री हो रही है.सभी किसी न किसी रुप में किसी को दोषी ठहरा रहे है या फ़िर प्रशन खडे कर रहे है. आज भी पाकिस्तान को दोषी और शहीदो को याद कर रहे हैं. यही होता आया है पहले भी और आज भी. सरकार की नाकामायाबी और राज्य की निष्क्रियता पर राजनीति होती आ रही है और होती रहेगी.

तो केवल इतना है कि आंतक का डर उसी रुप में बरकरार है. कई दावे सुरक्षा के मध्य नज़र हर घटना के बाद किये जाते है, आयोगो का गठन तो आम बात है. मानव अधिकारो के नाम पर दोषियो के प्रति सख्त कार्वाही करने से हिचकते है या कहे वोट बैंक की रजनीति हावी रहती है. केवल लोगो को गुमराह किया जाता है धर्म, मज़हब या फ़िर अल्पसंखय्को के नाम पर.

ज जरुरत है अपनी सुरक्षा संगठनो को और सशक्त बनाने की, गुप्त्चर विभाग को और जागरुकता बरतने की और आम नागरिक को और चौकस रहने की. इन तीनो को केवल राष्ट्र से जोड कर देखा जाना चाहिये ना कि जाति, धर्म और राजनीति से. भरस्क प्रयास होने चाहिये हर राज्य की ओर से चाहे सरकारे किसी भी राजनीतिक दल की हो या केन्द्र मे किसी की भी सरकार हो.पक्ष या विप़क्ष को राजनितिक फ़ायदे की लालसा को दर किनार कर देश की अखंडता के लिये साथ कदम उठाने की जरुरत है. कानून का पालन सख्ती से और दोषियो की सुन्वाई जल्द से जल्द और कडी सज़ा जिससे आंतक फ़ैलाने वाले इस तरह के कदम उठाने से पहले १०० बार सोचे. उन सभी लोगो को भी जो आंतकियो को शरण देते है उन्हे भी आंतकी समझ कर ही सज़ा देना जरुरी है. सविधान/कानून मे भी संशोधन की जरुरत है जिससे अपराधी इसका फ़ायदा उठा कर बच ना सके. सभी पुलिस महकमो मे शिक्षा और आधुनिकरण को स्थान देना होगा तथा उनकी उपयुक्तता को बढाना होगा. बेरोज़गारी और गरीबी जैसे मुद्दो की ओर भी देखना होगा जिससे युवाओ को सही दिशा मिल सके और उनका ध्यान देश विरोधी गतिविधियो या अपराधो की ओर ना जाये.

भी कार्यो को अंज़ाम देने के लिये इच्छाशक्ति की अहम जरुरत है. फ़िर देश से बडा क्या है. यदि हम सभी इस भावना से कार्य करे तो आंतक जैसे दानव से छुटकारा पा सकते है.

एक गीत जो १५ अगस्त २००९ को लिखा था उसे पुन: लिख रहा हूं. शहिदो को नमन करते हुये.

- सुनो वतन के रखवालो -

हे माटी के मतवालो, गीत हिंद के गा लो,

हर धर्म का है मान यहां, प्रेम जहां की भाषा है,

मां यही है,शक्ति यही है, सुनो वतन के रखवालो

सुनो वतन के रखवालो, गीत हिंद के गा लो।

इस माटी मे हम जन्मे हैं, इस माटी से प्यार करो,

प्यार हमारी शक्ति है, इसी में छुपी देश भक्ति है,

तिरंगे ध्वज की गरिमा को, आंच कभी ना आने देंगे।

सुनो वतन के रखवालो, गीत हिंद के गा लो।

आजादी कही छिन ना जाये, भारत को हमें बचाना है

वतन पर मरने वालो की, हमे यही तो दीक्षा है,

उठो स्वयं को तैयार करो, माटी का कर्ज चुकाना है,

सुनो वतन के रखवालो, गीत हिंद के गा लो।

भारत में रहनेवाला , हर एक इंसा हिन्दुस्तानी है,

धर्म कहीं लुटने ना पाये, करनी इसकी निगरानी है,

मां की लाज बचानी है, यही एक हमारा नारा हो।

सुनो वतन के रखवालो, गीत हिंद के गा लो।

सब युवाओ के कंधो पर, बागडोर है भारत की,

अब घडी है परीक्षा की, इसके लिये हर पल तैयार रहो,

गर्व है तुम पर भारत मां को, उसका पूरा सम्मान करो।

सुनो वतन के रखवालो, गीत हिंद के गा लो।

यह देव्य भूमि है,यह पुण्य भूमि है,इस पर कितने अवतार हुये,

हम स्वयं अंश है इस भूमि के, फिर क्यो कोई अपमान सहे,

दे देंगे जीवन अपना भी, लेकिन मां को कुछ ना होने देगे।

सुनो वतन के रखवालो, गीत हिंद के गा लो।

आज वचन ले हम सब, इसकी रक्षा करने का,

मर जायेंगे, मिट जायेंगे, सेवा मे अपने वतन की,

धर्म यही है कर्म यही है, हम तिरंगे के मतवालो का।

सुनो वतन के रखवालो, गीत हिंद के गा लो।


- प्रतिबिम्ब बड्थ्वाल, आबू धाबी, य़ू ए ई

6 टिप्‍पणियां:

  1. इस माटी मे हम जन्मे हैं, इस माटी से प्यार करो,

    प्यार हमारी शक्ति है, इसी में छुपी देश भक्ति है,

    तिरंगे ध्वज की गरिमा को, आंच कभी ना आने देंगे।

    सुनो वतन के रखवालो, गीत हिंद के गा लो

    बहुत सुन्दर, मगर अफसोस या यूँ कहलो कि देश का दुर्भाग्य कि हम एक सहीद की जैकेट भी नहीं संभल पा रहे है, दलदल में धंस कर !

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  2. aaj ek ek bharati ka kartvaya hai ki apane aas pass walo se savdhan rahe humen nahi maloom ki kaun gadhar apane hi watan ko hani kar reha hai. Naujawano ka farz hai ghar ghar mai desh bhakati ki ek aise bhav bhardae ki phir koi hamari matayo ka behano ka bacho ki jaan leva hmalo ki shikar na ho

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  3. अद्भुत रचना...बहुत बहुत बधाई..
    नीरज

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  4. shabd jaal se door .... aapke lekhan k baare main yahi khana chahungi...ki aap bahut achha likhte hain...

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  5. हादसों से सीख लेकर हादसों के खात्मे हेतु संकल्पित होने की आवश्यकता है....
    सुन्दर रचना!
    apt note!
    regards,

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  6. बहुत अच्छी रचना प्रति जी ..सुन्दर देश प्रेम कि भावना युक्त....
    सादर !!!

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आपकी टिप्पणी/प्रतिक्रिया एवम प्रोत्साहन का शुक्रिया

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