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गुरुवार, 8 सितंबर 2011

मैं आंतक हूँ




मैं आंतक हूँ

मेरा नाम सुना होगा
मैं 'आंतक' कहलाता हूँ
देखा होगा तुमने लेकिन
मेरा कोई चेहरा नही है
मैं भय लोगो में फैलाता हूँ
मुझे खून से बहुत प्यार है
मैं तो लाशें तैयार करता हूँ
मैं फिर लाशों पर चलता हूँ
देशद्रोहियों का असली हथियार हूँ
मानवता से मेरा कोई सरोकार नही
रोते बिलखते चेहरे आकर्षित करते है

बेखौफ हूँ क्योंकि
आपके बीच ही निरंतर पल रहा हूँ
आप से ही मुझे सहारा मिलता है
आपकी खामोशी मेरा मनोबल बढ़ाती है
आपके डर से ही मेरा जोश बढ़ता है
आप का गुस्सा केवल दो दिन का है
आप की सहनभूति केवल दो दिन की है
आपके आँसू भी तो केवल दो दिन के है
आप के सारे खुफिया व पुलिस तंत्र ढीले है
जो हादसो पर जागते हैं बाकी वक्त सोते हो
आपकी न्याय प्रक्रिया भी मुझे हौसला देती है
मानवाधिकार भी शायद मेरे लिए ही बना है
राजनीति पर तो मैंने बस पकड़ मजबूत की है
आपकी संवेदना भी तो अपनों तक सीमित है  

चंद रोज के बाद
मैं फिर खड़ा होता हूँ आपके ही सामने
मैं फिर चुनौती देता हूँ आपके ही सामने
मैं फिर आपकी बहस का हिस्सा बन जाता हूँ
मैं फिर आपको उसी उधेड़ - बुन मे पाता हूँ

मुझसे छुटकारा चाहते हो तो
अपनी सोच को आज से ही बदल डालो
कानून से मुझ पर तुम सख्ती डलवाओ
पुलिस व खुफिया तंत्र को सशक्त बनाओ
हादसो पर राजनीति को तुम दूर हटाओ
जागरूक नागरिक की भूमिका तुम निभाओ
सवेंदनशीलता छोड़ अब निर्भय बन जाओ
धर्म को इससे न जोड़ो और एक हो जाओ
चौकस रह अपनी सुरक्षा का जिम्मा उठाओ 

वरना मैं तो आतंक हूँ फिर खड़ा हो जाऊंगा

-  प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 

3 टिप्‍पणियां:

  1. बिल्कुल सही चित्रण किया है…………शानदार अभिव्यक्ति।

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  2. प्रति जी................आतंकवाद से लड़ना या सावधान रहना है तो हरेक देशवासी को भी जागरूक नागरिक बनना होगा | प्राशासन, सुरक्षा बल, इंटेलिजेंस, पुलिस, सरकार इन सबको तो एलर्ट हो ही जाना चाहिए और यह एलर्टनेस विस्फोट के बाद किसी काम की नहीं, बल्कि ऐसी हो की कोई हादसा होने ही न पाए | इस विषय पर आपकी रचना काबिले-तारीफ है.......

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  3. आपने आतंकवाद बहुत सुन्दर तरीके से प्रस्तुत किया
    बेहतरीन रचना...दिल को छूती है आपकी रंच्नाएं ...

    उत्तर देंहटाएं

आपकी टिप्पणी/प्रतिक्रिया एवम प्रोत्साहन का शुक्रिया

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