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गुरुवार, 21 मई 2015

शब्द मेरी पहचान



एक समूह में कुछ पंक्तिया लिखी थी फिर मित्रो के कहने पर इसमें विस्तार किया 

शब्द मेरी पूंजी, शब्द मेरा व्यापार
शब्द मेरी प्रतिज्ञा, शब्द मेरी पतवार
शब्द ही भक्ति और शब्द ही सदाचार 
शब्द ही सत्कार और शब्द ही संस्कार

शब्द मेरा सम्मान, शब्द मेरा हथियार 
शब्द मेरा विश्वास, शब्द मेरा व्यवहार
शब्द ही परामर्श और शब्द ही बहिष्कार 
शब्द ही अनुभूति और शब्द ही अलंकार

शब्द मेंरे पाप-पुण्य, शब्द मेरे हरिद्वार 
शब्द मेरे हार-जीत, शब्द मेरे पुरुस्कार
शब्द ही ब्रह्म और शब्द ही विस्तार
शब्द ही विनम्रता और शब्द ही अहंकार


शब्द मेरी मर्यादा, शब्द मेरा गरूर 
शब्द मेरी आत्मा, शब्द मेरा प्यार 
शब्द ही 'प्रतिबिंब', शब्द ही संसार 
शब्द ही औषधि और शब्द ही प्रहार
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