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रविवार, 10 जनवरी 2016

उसने कहा .....



कल तुम्हारे लिए था
उस कल से पहले
ये पल किसी और का था 
हाँ मेरा कल तुम्हारे लिए था
उस कल में जो
तुम्हारा था तुम्हे दिया
शायद न चाहते हुए भी
हाँ तुम, मुझसे
अब भी आस लगाये बैठे हो
आज और
आने वाले कल के लिए
लेकिन सुनो !
तुम्हारे लिए
मेरे पास अब कुछ नही
मेरा रास्ता अब अलग है
मेरी प्राथमिकता में तुम
अब शामिल नही
बहुत लोग बहुत काम
हाँ कुछ ख़ास भी है
जिनसे अब जुड़े रहना है
कुछ को अपना बनाना है
तुमने साथ दिया
एक सच्चे प्रेमी की तरह
और चाह भी आस भी
अभी भी
एक सच्ची मोहब्बत की तरह
और मैं शायद
एक बेवफा की तरह
साथ छोड़ रही हूँ
तुम कल का इंतजार करो
शायद कल लौट आऊं
उम्मीद तो
तुम्हे रखनी होगी मुझसे
चाहे लौटू या न लौटू
..............................तुम्हारी किस्मत
(किस्मत से गुफ्तगू)

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