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शुक्रवार, 12 जून 2009

मै


मै कौन हूँ ?

स्वयं को स्वयं से पूछता हूँ

परन्तु ,

उतर देने की स्थिति में

न मै स्वयं को पाता हूँ .

क्योंकि ,

न मै स्वयं को जानता हूँ ,

न ही स्वयं को पहचानता हूँ .

इसलिये,

मै स्वयं को पहचानने की

इच्छा मन में रखता हूँ

कुछ करने से पहले

ख़ुद को समझना चाहता हूँ

कभी - कभी

मै , मुझे सोचने पर करता है

मजबूर

क्या मै स्वयं के लिए हूँ ?

और नही तो

वो कौन से चीज है

जो मुझे, स्वयं से अलग रख सके।

- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल

( सन १९८५ में लिखे कुछ शब्द आज भी यही प्रश्नं रोज पूछते है).

16 टिप्‍पणियां:

  1. स्वयं को जान लेना - शुरु से ही एक बड़ा सवाल रहा है और आज भी अनसुलझा है। अच्छे भाव की रचना।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.

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  2. waah aapki kavita kisi satsang se kam nahin
    saadhu !
    saadhu !

    उत्तर देंहटाएं
  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपकी रचना बेहतरीन हैं उम्मीद करता हूं आपकी रचना आगे भी पड़ने को मिलेंगी........

    मैंने भी कुछ लिखा है देखिएगा...


    ***अक्षय-मन

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  5. May Avatar Meher Baba Bless You and Loved Ones.
    Avatar Meher Baba Ji Ki Jai
    Yours Lovingly
    Chandar Meher
    avtarmeherbaba.blogspot.com
    lifemazedar.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  6. सिर्फ़ प्रश्न?
    जबाब खोजे जाने चाहिएं।

    और जाहिर है ये मन की हलचल में नहीं मिलेंगे।
    मन को तीक्ष्ण करना होगा।

    अध्ययन..दर्शन का अध्ययन।

    आगे आपसे जबाबों की उम्मीद हैं।
    सुस्वागतम्....

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  7. आपका नाम बहुत प्रभावशाली है....
    इन यक्ष-प्रश्नों की तरह ही...

    उत्तर देंहटाएं
  8. जीवन की विसंगति को आपने काव्यमय अभिव्यक्ति दी है । भाव के स्तर पर कविता काफी प्रभावित करती है । मैने अपने ब्लाग पर एक लेख लिखा है- फेल होने पर खत्म नहीं हो जाती जिंदगी-समय हो तो पढें और प्रतिक्रिया भी दें-

    http://www.ashokvichar.blogspot.com

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  9. हिंदी ब्लॉग की दुनिया में आपका हार्दिक स्वागत है.....

    उत्तर देंहटाएं
  10. jab ham "main" ko jan lenge tab sab thik ho jayega. narayan narayan

    उत्तर देंहटाएं
  11. आप सभी लोगो के इस प्रेम से उत्साह मिलता है और मार्गदर्शन भी। वैसे तो एक दो ब्लोग है जहां लिखता हूं लेकिन इस ब्लोग के माधय्म से (जिसमे अन्य लोगो को भी शामिल करना चाहता हूं) मन मे जो उथल पुथल होती है उसको शब्दो के माध्यम से यहां अंकित करना चाहता हूं। यदि आप भी इस्मे साथी बनना चाहते है तो आपका स्वागत है।

    उत्तर देंहटाएं
  12. स्वयं को जान liyaa तो फिर दुनिया को jaanaa जाता है........... achaa लिखा है

    उत्तर देंहटाएं
  13. आप की रचना प्रशंसा के योग्य है . आशा है आप अपने विचारो से हिंदी जगत को बहुत आगे ले जायंगे
    लिखते रहिये
    चिटठा जगत मैं आप का स्वागत है
    गार्गी

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  14. मैं कौन हूं? जो स्वयं से इस सवाल को नहीं पूंछता है, ज्ञान के द्वार उसके लिए बन्द ही रह जाते है। उस द्वार को खोलने की चाबी यहीं हैं कि स्वयं से पूछो, `` मैं कौन हंू ? ´´ और जो तीव्रता से, समग्रता से अपने से यह सवाल पूछता हैं, वह स्वयं ही उत्तर भी पा जाता है।

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  15. बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

    उत्तर देंहटाएं

आपकी टिप्पणी/प्रतिक्रिया एवम प्रोत्साहन का शुक्रिया

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