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गुरुवार, 23 सितंबर 2010

फूल की कहानी


फूलो की बगिया
खुबसूरत दुनिया
प्रकृति ने बनाया
माली ने सज़ाया
हर रुप हमे भाया
हर भाव इसमें पाया
जीवन जब आया तो
प्रभु को इसे चढाया
मौत का हुआ सामना
बन हार उसे विदा किया

कोई वीर जब शहीद कहलाया
सम्मान दे फूलो को अर्पण किया
फूलो का ही आसरा नज़र आया
जब प्रेमी बन कर अपना प्रेम जताया
विवाह हो या कोई जश्न मनाया
बन माला सबको अपना बनाया
प्रभु पूजा या आरती, तु ही काम आया
दक्षिणा ना पास तो तुझे आगे सरकाया

फूल ने जब सुनी मेरी, दिल उसका भी रो दिया
कुछ आंसू दर्द के, कुछ खुशी से उसने बया किया
मेरा अंत निश्चित है टूट कर जब गिर गया
खुशी है टूट कर भी काम तुम्हारा कर गया
फूलो की इस कहानी को तुमने आज सुनाया
कांटो की कहानी का वक्त अभी नही है आया

- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल

2 टिप्‍पणियां:

  1. वाह प्रतिजी; आपने फूलों की हर दशा दिखा दी:)

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  2. कहानी तो फूल की ही होती है काँटे की भी कोई कहानी होती है भला ।

    उत्तर देंहटाएं

आपकी टिप्पणी/प्रतिक्रिया एवम प्रोत्साहन का शुक्रिया

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