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बुधवार, 22 जून 2011

हम हिन्दुस्तानी




हम हिन्दुस्तानी

देश प्रेम का राग हर कोई अलापे
हर कोई प्रेम की माला यहाँ जापे
नोट रिश्वत के यहाँ हर कोई छापे
मन किसी का कोई न यहाँ भापे

तिरंगे की शान में सब कसीदे पढ़ते
देश के नाम पर हैं सब सजदे करते
मर जाएंगे कट जाएंगे सब है कहते
लेकिन आए मौका तो घर मे छुपते

अहिंसा का ढ़ोल पीटते इसे ही हथियार कहते
जो शहीद हुये उन्हे तो हम आतंकवादी कहते
वोटो के लिए धर्म - जाति का हैं सहारा लेते
राष्ट्र एकता के नाम पर जनता से सब खेलते

अपनी आज़ादी को अब स्वार्थ में मिला दिया है
पाश्चात्य को अपनी संस्कृति से बड़ा बना दिया है
मान - मर्यादा, आदर - सत्कार सब भुला दिया है
आज़ादी के नाम पर खुद को बाज़ार बना दिया है

सोने की चिड़िया देश था हमारा, ये कह कर गौरव पाते
वक्त आने पर देश को बेचे, येसा काम हम हैं कर जाते
अमीरी को रुतबा माने, गरीबी को चित्रो व लेखो मे पाते
कृषि प्रधान देश मे ही किसान आत्महत्या है करते जाते

खेल मे शूट 3 करोड़ पाते, सीमा के शूटर वीरगति मे 5 लाख पाते
गुरुओं का अपमान बेझिझक कर जाते, आंतकियों से प्रेम हम जताते
राष्ट्र सर्वोपरि कहकर चुप हो जाते, देश की संपति को बाहर हैं भेजते
अँग्रेजी से मोह को बड़प्पन माने, राष्ट्र भाषा हिन्दी को हैं भूलते जाते

स्वतन्त्रता के अधिकार को बस अपना अधिकार माना है
जो चाहे कहना, जैसे चाहे रहना बस अपना हक जाना है
धर्म कर्म को मज़ाक बनाया, आजादी बस इसको माना है
यह सब कर पाता हूँ इसलिए खुद को हिन्दुस्तानी माना है

-प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 

4 टिप्‍पणियां:

  1. एक सच्चे देशवासी के दर्द को उजागर करती सुंदर प्रस्तुति

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  2. सुंदर अभिव्यक्ति प्रति जी ...सही कहा आपने ...देश प्रेम का राग हर कोई अलापे ....नोट रिश्वत के यहाँ हर कोई छापे
    मन किसी का कोई न यहाँ भापे ....

    उत्तर देंहटाएं

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