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सोमवार, 4 अप्रैल 2016

तेरा नाम




तेरा नाम ही मन को झंकृत करता है
एहसास में ही तन मन झूम उठता है

कहाँ छोडू एहसास, बैचेनी और इंतजार
पल पल याद करता है तुम्हे मेरा प्यार

बंधक हूँ तेरी सांसो का, तेरी महक का
क्या मिलेगा मुझे, उपहार मेरे प्यार का

प्यार में रचा-बसा, रोम-रोम तन मन का
आस है जिंदा, भरोसा मुझे मेरे प्यार का
 
जब जब दूर हुई, तब दिल बहुत तडपा है
लौटने तक ये, आख़िरी सांस सा अटका है

मिलते ही गिला न, कोई शिकवा रहता है
मन प्रफुल्लित, तन सुगन्धित सा लगता है

सिखाई प्रेम की भाषा, उस में ही बात करो
रह जाता जो अनकहा सा, तुम उसे पूरा करो

सुनो, तुम्हारे हाथो में है अब मोहब्बत मेरी 
प्यार को प्यार करो तुम, यही है आरजू मेरी


प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल ४/४/२०१६

शुक्रवार, 11 मार्च 2016

उसे बतला देना ...




भावो को लिख चूका
एक आस से नाता जोड़ा है
जिंदगी कर नाम उसके
प्यार को खुद से जोड़ा है
पास या दूर
शायद वक्त का फैसला है
लेकिन अभी
उदास मन को समझा बुझा
एक कोने  में रख छोड़ा  है
बस इतना कहा है कि
उनके लौट आने की
गुंजाईश बहुत कम है
फिर भी 
आये अगर लौट कर
प्यार की बारिश कर देना
रोम रोम तुम उसका भिगो देना
रह न जाए कोई कसर बाकी
तब बन जाना मय तुम साकी
अधर कुछ कहने लगे तो
अधरों को अपने मिला देना
प्रेम का बोध अगर हो जाए
तन मन तब अर्पित कर देना
चाह का मधुर लेप लगाकर
प्रेम लहरी तुम गा लेना
झंकृत हो जब कण कण देह का
बस प्यार का राग सुना देना
दिल और रूह की संधि है
समझौता नही समर्पण है
प्रेम मेरा तुम उसे यूं बतला देना

- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल ११/३/२०१६ 
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