पृष्ठ

रविवार, 28 जून 2009

कैसे ?



दूरियां दर्मियां होती तो
पास तुम्हारे हो्ता कैसे?
आंखे मिलती नहीं हमारी तो
इन आँखो में बसाता कैसे?
तुमसे अनजान होता तो
अपनी जान बनाता कैसे?
आवाज सुनी ना होती तो
प्यार के स्वर सुनता कैसे?
इंतजार किया न होता तो
मिलने का पल समेटता कैसे?
अहसास रुक जाते तो
सांसे यूं समाती कैसे?
प्रीत तुमसे की न होती तो
गीत मन के लिखता कैसे?
- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल
(यह भी मेरी पुरानी रचनाओ में से एक है )

3 टिप्‍पणियां:

  1. आवाज सुनी ना होती तो
    प्यार के स्वर सुनाता कैसे ?
    इन्तजार ना किया होता तो
    मिलने का पर समेटता कैसे ?
    वेसे तो सबका अपना अपना सोचना है
    पर मेरे सोचे इन चार पंकित्यों में बहुत कुछ
    कह दिया आपने प्रतिबिम्ब जी !!!

    उत्तर देंहटाएं

आपकी टिप्पणी/प्रतिक्रिया एवम प्रोत्साहन का शुक्रिया

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...