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सोमवार, 25 जनवरी 2010

मेरी आँखो मे बसते है सपने




मेरी आँखो मे बसते है सपने
कब तक सच होंगे मेरे सपने

सभी कहते है सब मेरे अपने
बताते है वो ये पराये ये अपने

लगते हैं  इस देश में सब पराये
जीने मरने का भेद मुझे समझाये

ये मेरा प्रदेश ये उनका प्रदेश
कौन मित्र है किनसे है द्वेष

मेरे धर्म का क्या है संदेश
उनका धर्म क्या देता संदेश

रंग दिखता है लाल चारो ओर
भाषा का मचाते है सब शोर

मेरी आँखे बस देखे ये ही सपना
देश प्रेम और स्नेह बस हो अपना


- प्रतिबिम्ब बड्थ्वाल

2 टिप्‍पणियां:

  1. बढ़िया!!


    गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ.

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  2. shubhkaamnaye ..prati ji... desh bhaqti se ot prot kavita... bahut khoob Dr Nutan

    उत्तर देंहटाएं

आपकी टिप्पणी/प्रतिक्रिया एवम प्रोत्साहन का शुक्रिया

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