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सोमवार, 6 जुलाई 2015

जख्म




तब चल रही थी बयार कुछ हल्की हल्की
बरस रही थी तब फुहार कुछ हल्की हल्की
अहसास मन में भीग रहे थे कुछ धीरे धीरे
चाहत के फूल खिलने लगे थे कुछ धीरे धीरे

ख्वाब हकीकत से लगने लगे थे होले होले
कश्ती प्यार की तैरने लगी फिर होले होले
खुशबू से उसकी महकने लगे थे तन मन
संगम प्रीत का महसूस कर रहे थे तन मन

फिर वक्त और किस्मत चलने लगे संग संग
टूटने लगे वो ख्वाब सारे जो बुने थे संग संग
वक्त का आंधी तूफ़ान करने लगा हमें दूर दूर
कल थे पास पास आज हम हो गए है दूर दूर 

जानता हूँ किस्मत के सितारे बदलते है पल पल
भावो में छिपी आस की जंजीर टूटती है पल पल
‘प्रतिबिम्ब’ ये जिंदगी यूं भी सताती है कभी कभी

जिंदगी जख्म पर जख्म देती जाती है कभी कभी 

- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 

मंगलवार, 23 जून 2015

जल की मछली जल में भली




जिन्दगी बड़ी बड़बोली है भाया, न जाने कब क्या बुलवा दे. क्या क्या लिखवा दे, क्या क्या छपवा दे. मैं कहूं तो मुझे सच लागे, वही बात तू कहे तो झूठ लागे, फरेब लागे. लेकिन एक बात तो है बड़ा लुत्फ़ है जिन्दगी में. अगर ठान ले जीना तो फिर किस माई के लाल की मजाल जो जीना छुडवा दे. लेकिन आज कुछ मूड अलग किस्म का हो रहा दोस्तों. कभी गुमान हो जाता कि लिखना ‘मेरे बाए हाथ का खेल’ परन्तु लिखूं क्या, बायाँ क्या दायाँ हाथ भी साथ न दे रहा. खैर सोच तो हमारी ‘लंगोटिया यार’ ठहरी. सोचते सोचते मुहावरों की दुनिया में दिमाग उछल कूद करने लगा. ये लोग, वो लोग, दोस्त और अपने लपेटे में आ गए. ‘गुड खाए और गुलगुले से परहेज’ तो नही हो सकता न.

यहाँ तो न जाने कितने लोगो की ‘पेट में दाढ़ी’ उग आई है बात बात पर दूसरे को नीचा दिखाने को तैयार रहते अगर उनके मन की न हो तो. अजीब सी दुनिया है यारो कही ‘आँख चार होती है’ कही कोई आँखे बिछाए’ बैठा रहता है. कोई ‘आँख दिखा’ रहा है तो कोई ‘आँख में खटक’ रहा है. कहीं भीड़ थाम्बे नही थमती, कहीं सुनसान पड़ा है हर कोना. पर मोह माया सा ऐसा जाल फैला है कि यहाँ होड़ लगी रहती है. कोई ‘आँखो में उतर’ रहा है तो कोई ‘आँखों से गिर’ रहा है. यहाँ ‘मित्र बहुतेरे’ कुछ तेरे कुछ मेरे.

‘सोसियल नेट वर्किंग साईट’ में महिला दोस्त की हाँ में हाँ मिलाने वाले कतारबद्ध ऐसे खड़े होते है जैसे मंदिर में खड़े हो और प्रसाद इनकी मुंह में सीधा गिरने वाला हो. ज़रा सी आहट हुई नही कि उन्हें ‘अपना उल्लू सीधा करने’ का रास्ता चौड़ा और साफ़ दिखाई देने लगता है. यहाँ ‘धुन के पक्के’ लोग भी है जो ‘चिकने घड़े’ से है उन पर कोई असर होता न दिखे. वे अपनी धूर्तता और नापाक इरादों की चासनी पिलाने का कोई मौका नही छोड़ते. हाँ कछु ऐसे लोग भी है जो ‘राई का पहाड़’ बना उड़ते रहते है और सांत्वना की आड़ में अपना स्वार्थ तलाशने में लगे रहते है. कुछ कामयाब हो जाते है. कुछ को किसी की ‘बुरी नज़र का शिकार’ होना पड़ता है. किसी वर्ग विशेष को ‘कटघरे में खड़ा करना’ कुछ लोगो को आदत है. लोग ‘अपने गिरबान में झांकते’ नही अपवाद को लेकर वर्ग विशेष के लोगो के ‘कपडे उतारते’ है या उन्हें ‘हंसी का पात्र’ बनाते है.   

‘सीमा लांघने’ वालो की भी कमी नही, ‘अंगुली पकडाओ’ तो हाथ खींचने को तैयार. हम ‘अपने मुंह मियां मिठ्ठू’ तो नहीं पर ‘उड़ती चिड़िया पहचान’ लेते है. दिमाग की बत्ती’ आन कर लेते है ऐसे मौसम में और सावधानी का बोर्ड सामने टांग लेते है. भई सामने वाले को सचेत करना भी तो हमारी जिम्मेदारी बनती है. कुछ तो गिरगिट को भी पीछे छोड़ देते है रंग बदलने में लेकिन ‘आस्तीन के सांप’ तो हर जगह ‘केंचुली मार कर बैठे’ रहते है और मौका पाते ही डस लेते है.

राजनीति अब संसद, चुनाव छोड़ लोगो के बीच ‘पैर पसार’ चुकी है. ‘कागजी शेर’ के साथ साथ ‘परदे के पीछे’ से पटकथा लिखने वाले बहुत है ‘पराई आग में हाथ सेंकने’ वालो की कमी नही यहाँ. ‘नया नौकर काम करे बढ़िया’ वाली तर्ज पर साथ जुड़ते है और फिर ‘जिस थाली में खाया उसी में छेद करके’ चलते बनते है. ‘गड़े मुर्दे उखाड़ने’ वाले, ‘तलवे चाटने’ वाले. टोपी उछालने वाले’ अक्सर बिन पैंदे के लौटे’ जैसे मिल जाते है यहाँ. ‘नानी के आगे ननिहाल की बाते’ करते लोग उबते नही. पर लोग काहे नही समझते ‘जल की मछली जल में ही भली’ लगती है.

खैर ! हमारे लिए तो भाया ‘सावन हरे न भादो सूखे’ क्योकि अब ‘जल में रहकर मगरमच्छ से वैर’ कैसा. इसलिए अब अपनी ‘चुप्पी भली’. हमने तो कुछ कहा नही बस दिमाग ससुरा लिखवा देता है कुछ भी.. वैसे अपनी किस्मत ऐसी की ‘ऊंट पर बैठे तो भी कुत्ता काट खाए’. फ़िलहाल तो हम ध्यानमग्न है यहाँ. हम मानते है कि ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ और जानते है कि ‘सहज पके जो, वो मीठा होय’

-    प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 

सोमवार, 22 जून 2015

खुद से प्यार खुद से चाह





यहाँ अब दोस्तों को
दोस्त समझना अतिश्योक्ति होगी
जुड़ जाएगा वो स्वयं ही
जब उसे हमारी जरुरत होगी
मतलब की दुनिया में
वक्त आइना दिखाता है
दोस्त कहने वालो का
असली चेहरा दिखला देता है
डरता हूँ कही मेरे शब्दकोष से
दोस्त शब्द ही न एक दिन हट जाए

हाँ उन्हें अपना कहना बेहतर
जो हर मोड़ पर आते हैं नज़र
मौसम अपनेपन का जहाँ बदलता नही
मुझे लगता वही व्यक्ति विशेष सही
अपना गर पराया बन जाए तो सह लेंगे
दोस्त को दुश्मन बनते कैसे सह लेंगे
अब खुद से प्यार खुद से चाह करूँगा
दूसरो का न कोई अहसान अब लूँगा
अँधेरे में गुम हो भी जाए 'प्रतिबिंब' अगर
जानता हूँ रहेगा अपने साथ ही वो मगर

बुधवार, 3 जून 2015

फरमान किस्मत का



['' अक्षर से  निर्मित शब्दों पर  भाव]


‘फखर’ था कभी, जब जिंदगी में हर ‘फतह’ हमारी होती थी
हर ‘फलसफा’ मेहनत का, हम पर ही सदा ‘फलित’ होता था

‘फणित’ वक्त ‘फकत’ अपने ‘फंग’ में हमें सदा कसता रहा
वक्त भी ‘फंद्वार’ बन कर हमसे ही अब ‘फरागत’ पाता रहा

‘फलक’ पर लिखा पढ़ न सका ‘फलत’ सा इंतजार करता रहा
‘फक’ था पैगाम वक्त का, गमो का ‘फफदना’ सदा जारी रहा

‘फरेब’ का ‘फण’ रोज बढ़ता रहा, प्यार का एहसास ‘फजूल’ रहा
‘फुरसत’ कहाँ हमारे नसीब को,‘फंदा’ नियति का सदा झूलता रहा

‘फेरौती’ जैसे भावो को बुनता रहा, तन - मन मेरा ‘फकीर’ होता रहा
‘फेनाग्र’ चाहत का उठता रहा ‘प्रतिबिंब’, ‘फुरकत’ को ‘फलादेश’ कहता रहा


मंगलवार, 26 मई 2015

मोदी @३६५




मोदी के ३६५ दिनों को लोग [ चैनल - सबके अपने अपने पैनललिस्ट और जो शुरू से ही मोदी विरोधी रहे अधिक ] देख रहे है केवल टीवी चैनलों पर या अखबारों के जरिये या पोल सर्वे द्वारा. आंकड़ो के फेर में मैं नही पड़ता लेकिन जो मैंने पाया एक भारतीय होने के नाते

* राज्य सभा में १०१ % कार्य
* लोकसभा में १२३% कार्य
[ संसद में पिछले १५ साल में सबसे अधिक काम ]
* १ साल में ४७ बिल पास [ इन बिलों की लोग मिडिया चर्चा नही करता केवल ३ बिल जिसमे राज्यसभा में राजनितिक कारणों से सफलता न मिलना लेकिन अब सेलेक्ट कमेटी में भेजा गया]

* १७ बड़ी योजनाओ की शुरुआत [स्वच्छ भारत अभियान, जनधन योजना, नमामी गंगे, डिजिटल इण्डिया, मेक इन इण्डिया, श्रेमेव जयते, बेटी बचाओ बेटी पढाओ, बीमा योजना, पेंशन योजना, सिंचाई योजना, स्वाइल हेल्थ कार्ड, मुद्रा बैंक, आज ही २४ घंटे किसान चैनल की शुरआत..  ऐसी ही कई  योजनाये ] ..... क्या इन योजनाओ से आने वाले  समय में लाभ होगा  या नही .ये किसके लिए है .. सोचिये  मित्रो

* १८ देशो का दौरा [ योग दिवस के लिए १७७ देशो का समर्थन, पूंजी निवेश की संभावनाए, मेक इन इण्डिया जैसी सोच के लिए देशो को, उनकी कम्पनियों को प्रेरित करना, कूटनीति के लिहाज से देशो का दौरा, पड़ोसियों को फिर से भरोसा देना जिसमे चीन की भागेदारी बढ़ रही थी, सभी देशो द्वारा भारत को सम्मान देना - विश्व गुरु बनने की दौड़ में प्रयासरत मोदी, हर देश में भारतीय संस्कृति और संस्कार की छाप छोड़ना ]

* रेल, सुरक्षा और रक्षा के  क्षेत्र में साहसिक कदम. [ अन्य क्षेत्रो में भी कार्य हुए है जैसे संचार, शिक्षा आदि महकमो में ]

* केवल नेहरू गांधी ही नही देश में अन्य नेता भी हुए है, उन्हें सम्मान देने का दिल से कार्य शुरू हुआ है

* काले धन पर काम
- एस आई टी गठित
- दो महीने का समय दिया है काले धन वालो को कि टैक्स पे करो वरना जुर्माना तो लगेगा ही,
- जाँच होगी और १० साल तक सजा का प्रवधान,
- बैंक खाते वाले देशो के साथ संधि के दिशा में प्रयास... कुछ के नाम सार्वजनिक हुए .. आज भी ५ लोगो के नाम सिवस बैंक ने जारी किये. पिछली सरकार ने जो स्थिति बनाई है काले धन पर उसके नियमो के कारण उसमे समय तो लगेगा ही.

मुझे पसंद आया  सरकार का
१. स्पीड - एक्शन मोड [ प्रधानमंत्री का ओवारएक्टिव होना  इसका विशेष कारण रहा ]
२. देशो में प्रभुत्व व् कूटनीति विदेश नीति  के तहत - नेपाल में सहायता हो. चाहे यमन, श्रीलंका, ईराक और अफगानिस्तान से भारतीयों को सुरक्षित वापिस
३. कुछ ख़ास कार्यो में सीमा तय करना ... जैसे २०२२ तक सबको घर देना [ बिजली पानी की समस्या से निजाद के साथ ], स्वछता अभियान - जिसका सीधा प्रभाव लोगो के जीवन पर, स्वास्थ्य पर, टूरिज्म पर, रोजगार पर  .... अधिकतर योजनाये सीधे गरीब के हित में है
४. पारदर्शिता के साथ कार्य , भ्रष्टाचार पर लगाम अभी तक

अवश्य ही आने वाले समय में ये योजनाये, नीतिया और मोदी जी का नेतृत्व विकास की नई ऊंचाईया को छुएगा. महंगाई बेरोजगारी जैसी चुनोतियो का सामना करना ही होगा लेकिन मोदी जी की सोच, उनका विश्वास और १२५ करोड़ जनता का प्यार उन्हें अपने कार्य के बल पर सभी चुनौतियों का सामना करंने में सहायक होगा.

मुझे अपनी उम्मीद से उम्मीदे है ... आशा और विश्वास है एक भारतीय होने के नाते - जय हिन्द

प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल, शारजाह , यूएई 

गुरुवार, 21 मई 2015

शब्द मेरी पहचान



एक समूह में कुछ पंक्तिया लिखी थी फिर मित्रो के कहने पर इसमें विस्तार किया 



शब्द मेरी पूंजी, शब्द मेरा व्यापार
शब्द मेरी प्रतिज्ञा, शब्द मेरी पतवार
शब्द ही भक्ति और शब्द ही सदाचार 
शब्द ही सत्कार और शब्द ही संस्कार

शब्द मेरा सम्मान, शब्द मेरा हथियार 
शब्द मेरा विश्वास, शब्द मेरा व्यवहार
शब्द ही परामर्श और शब्द ही बहिष्कार 
शब्द ही अनुभूति और शब्द ही अलंकार

शब्द मेंरे पाप-पुण्य, शब्द मेरे हरिद्वार 
शब्द मेरे हार-जीत, शब्द मेरे पुरुस्कार
शब्द ही ब्रह्म और शब्द ही विस्तार
शब्द ही विनम्रता और शब्द ही अहंकार

शब्द मेरी मर्यादा, शब्द मेरा गरूर 
शब्द मेरी आत्मा, शब्द मेरा प्यार 
शब्द ही 'प्रतिबिंब', शब्द ही संसार 
शब्द ही औषधि और शब्द ही प्रहार

मंगलवार, 5 मई 2015

कुछ तो बात है....


तेरी तस्वीर से जब मुलाकात होती है 
मेरे गीतों में लिपटी इश्क की बंदिश लगती है 
थिरकती मुस्कान लेकिन होंठो की तपिश लगती है 
तन मन से उभरी अधूरी ख्वाइश सी लगती है

मचल रहे अहसास जैसे मर्यादा तोड़ रहे है 
हरियाली इश्क की जैसे तुझे मुझसे जोड़ रही है 
कुछ तो बात है तस्वीर में जो हवा का रुख मोड़ रही है 
आगोश में सिमटे है जज्बात, हार जीत की होड़ मची है

- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 



मंगलवार, 28 अप्रैल 2015

बेखबर अल्फाज़




सूर्य उदय या
सूर्य हुआ अस्त
तस्वीर का रुख
समझ न पाया

लड़खड़ाते से भाव
पनाह ढूँढते है
अक्षर प्रेम के
बिखरे पड़े है

हवा गमो की
आँधी बन आई है
मौसम बेईमान हुआ
पत्ता पत्ता टूटा है

रात दिन एक सा
अंधकार का कहर है
करवट बदलता वक्त
नाराज़ हर पहर है

थमी थमी सी साँसे
बेखबर है अल्फाज़
दुनियां बेसुध 'प्रतिबिंब'
दफन हुए झूठे अहसास

रविवार, 12 अप्रैल 2015

रात बात करती है .....




तू कौन है, जानता नही मन भ्रमित है
तू मौन है, लेकिन मेरा मन विचलित है
तेरे शब्दों के सफर में भाव विस्मित है
अहसासों की तपिश में मन संकुचित है

एक कोमल काया, मायावी जान पड़ती है
एक बेसुध छाया, साथ साथ चल पड़ती है
दौड़ने की चाह, लेकिन साँसे रुक पड़ती है
अहसास ढूँढते छाँव, आह निकल पड़ती है

मेरी तन्हाई, न जाने किस से बात करती है
मेरी तमन्ना, फिर मदहोशी की बात करती है
आस 'प्रतिबिंब',अब खुशियों की बात करती है
कह चुकी शाम बहुत, अब रात बात करती है


-प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल

सोमवार, 6 अप्रैल 2015

सुनो ! एक बार कह दो



सुनो ! एक बार कह दो
तुम्हे मेरी अब जरुरत नही
तुम्हारे जीवन में अब मेरा स्थान नही
तुम मेरी हो यह दिखाने की जरुरत नही


सुनो ! एक बार कह दो
तुम्हे मेरी अब जरुरत नही
तुम्हारी जिन्दगी से मैं चला जाऊंगा
जैसे आया था, उसी वीराने मै लौट जाऊंगा

सुनो ! एक बार कह दो
तुम्हे मेरी अब जरुरत नही
केवल तुम्हे याद कर मैं जिन्दा रह लूँगा
तुम खुश हो ये जानकार मैं खुश रह लूँगा

सुनो ! एक बार कह दो
तुम्हे मेरी अब जरुरत नही
मैं अपना प्यार और आँसू छुपा लूँगा
तुम मेरा प्यार हो, खुद से झूठ बोलना सिखा दूंगा 

सुनो ! एक बार कह दो
तुम्हे मेरी अब जरुरत नही
मुझे तुम्हारी परवाह नही, यह सच मैं छुपा लूँगा
तुम किसी और से प्यार करती हो, ये दर्द छुपा लूँगा

सुनो ! एक बार कह दो
तुम्हे मेरी अब जरुरत नही
तुम्हे किसी और की बाँहों में देख, मुँह मोड़ लूँगा
तुम अतीत हो मेरा, ज़माने से ये बात छुपा लूँगा

सुनो ! एक बार कह दो
तुम्हे मेरी अब जरुरत नही
अहसासों संग जी लूँगा, तुम्हे न कोई परेशानी होगी
चला जाऊंगा दूर, तुम्हे न पास होने का अंदेशा होगा

सुनो ! अब मैं जा रहा हूँ
जानता हूँ तुम्हे मेरी अब जरुरत नही
तुम्हारे लिए दुआओ का सिलसिला जारी रहेगा
जिस जहाँ में भी रहूँ बंद आँखों से देखता रहूँगा  

प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 
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