सत्य की झूठ पर जीत का जश्न मनाओ
अच्छाई की बुराई पर जीत का जश्न मनाओ
आओ मित्रों अपने अंदर के राम को जगाये
आओं मित्रों अपने अंदर के रावन को जलाये
राम भी हम रावण भी हम फिर संशय कैसा
छोड़ झूठ और बुराई, करे व्यव्हार इंसानों जैसा
प्रभु का ध्यान कर महिमा उसकी हम पहचाने
मार्ग अंहिसा का अपनाये,धर्म हम अपना पहचाने
विजय निश्चित है अगर हम आज ये प्रण करे
एक दूजे में प्रभु को ढूढे और मानवता से प्रेम करे
[मित्रों आप को, परिवार को, सगे संबधियों को एवं आपके मित्रों को विजय दशमी की शुभकामनाये]
– प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल







