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मंगलवार, 24 अगस्त 2010

पागल कहती है ये दुनिया


पागल कहती है ये दुनिया
बूझे ना कोई मेरी बतिया
काटे नही कटती ये रतियाँ
बस जमाना बढाये दूरियाँ

पागल कहती है मुझे ये दुनिया

दिल मे बसे मेरे कुछ सपने
चाहू बस कुछ दिल से अपने
रट लगाये तो लोग लगे कहने
पागल है ये और इसके सपने

पागल कहते है मुझे मेरे अपने 

टूट कर चाहना भी पागलपन मेरा
इसमे लुट जाना भी पागलपन मेरा
भरोसा किया, था पागलपन मेरा
अहसास जताया,था पागलपन मेरा

ले डूबा मुझे ये पागलपन मेरा

दोस्त समझा, था पागलपन मेरा
अपना समझा, था पागलपन मेरा
समझाना अपनो को, था पागलपन मेरा
जगाना सबको चाहा, था पागलपन मेरा

आप को अपना बनाया, था पागलपन मेरा

आज मेरा सीधापन बन गया मेरा पागलपन
आज मेरा स्नेह बन गया मेरा पागलपन
आज मेरा कुछ कहना बन गया मेरा पागलपन
आज मेरा अनुभव बन गया मेरा पागलपन

फिर भी सबसे अलग है मेरा पागलपन


- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल, अबु धाबी, यूएई




रविवार, 22 अगस्त 2010

रेखा सीमा की......




सीमा क्या होती है
जो हद मे रहना सिखाती है
पहले मालूम न था
सोचता था मै
रिश्तो की सीमा 
उसके नाम से शुरु होती है
उस नाम के साथ रहती है
हर पल उसमे जीना
आदत सी थी

लेकिन अब समझ पाया
सीमाये दोस्ती की 
सीमाये प्यार की 
सीमाये मर्यादा की
सीमाये रिश्तो की 
सीमाये हक की
सीमाये अपनो की

इन सीमाओ पर 
अब रेखा खिंच चुकी है
एक रेखा 
जो आप को आपका 
स्थान दिखाती है
आप कौन है
आपका चेहरा दिखाती है
आपको जिदंगी की हकीकत से 
रुबरु करवाती है लेकिन 
भावो से दूर ले जाती है

अब एक रेखा सीमा तय करती है
आप कितने पास कितने दूर है
अब एक रेखा सीमा तय करती है
आप की बातो की इज़ज्त कितनी है
अब एक  रेखा  सीमा  तय करती  है
आप के सच्चे ज़ज़्बात कितने झूठे है
अब  एक  रेखा  सीमा  तय करती है
आप उस रिश्ते की मर्यादा से बाहर है

रेखा सीमा की आज फिर खिंच चुकी है

- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल , अबु धाबी, युएई

मुझसे पूछ लेना ....


जिंदगी मे.....

दोस्त और दोस्ती की कहानी
मुझसे पूछ लेना
वफा और बेफाई का सबब
मुझसे पूछ लेना

कल और आज की कहानी
मुझ से पूछ लेना
आज और कल की तन्हाई
मुझ से पूछ लेना

विश्वास और अविश्वास की कहानी
मुझ से पूछ लेना
प्यार और नफरत की दास्तां
मुझ से पूछ लेना

चेहरे और नकाब की कहानी
मुझसे पूछ लेना
फूल और कांटे की जुबानी
मुझ से पूछ लेना

दोस्त और दुशमन की कहानी
मुझ से पूछ लेना
सांस और आस की रवानगी
मुझसे पूछ लेना

दिल जुडने और टूटने की कहानी
मुझ से पूछ लेना
आंसू और दर्द की रिश्ता
मुझ से पूछ लेना

ख्वाबो और हकीकत की ये कहानी
मुझसे मत पूछ लेना
लिखे को पढना और समझना
मुझसे मत पूछ लेना

-प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल, अबु धाबी, यूएई

रविवार, 15 अगस्त 2010

खुद को सच्चा हिन्दुस्तानी कहलाये

14 अगस्त 2008 को लिखी एक रचना इस ब्लाग मे लिख रहा हूँ 




तिरंगा हमारी आन है बान है
हर हिंदुस्तानी की ये शान है

शहीदों की कुर्बानी की अलग कहानी
कुछ गोली खाकर शहीद कहलाये
कुछ फ़ासी के फ़ंदे पर झूल गये
कुछ ने देश के लिये किया समर्पण
कुछ ने किया सब कुछ अपना अर्पण

आज हम हर माने में स्वतंत्र है
लेकिन फ़िर भी बिगड़े सारे तंत्र है
गरीबी अमीरी की खाई बढती जा रही
आंतक की बू हर दिन फैल रही
राजनीति भी खूनी - खेल खेल रही

आजादी के जशन हम हर साल मनाते है
लेकिन मानवता को हर पल भूलते जा रहे है
देश और लोग उन्नति की ओर अग्रसर है
आम जिदगी फ़िर भी इससे बेअसर है
ढूँढते रहते ये सब किसका कसूर है?

आओ आज तिरंगा फ़िर लहराये
अमीरी गरीबी का ये भेद मिटाये
राजनीति से हटकर प्रेम फैलाये
जाति - भाषा का ये जाल हटाये
खुद को सच्चा हिन्दुस्तानी कहलाये

वन्दे मातरम!

- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल, आबूधाबी

शुक्रवार, 6 अगस्त 2010

युवा पीढी


इसमे युवा पीढी पर एक नज़र और एक संदेश भी संक्षिप्त रुप मे। ये नही कह रहा कि सारे युवा एक जैसे है लेकिन अधिकतर आज की इस दौड मे शामिल है।

-    प्रतिबिम्ब ड़थ्वाल



युवा पीढी

आज की ये युवा पीढी
जाने कैसी चढ रही सीढी
कहते है हम है आज़ाद पंछी
हमने ही है दुनियादारी समझी

बालक तो अब ले बैठे है नये नये रोग
मां-बाप के पैसे से करते है क्या क्या भोग
आदर सत्कार पर लगाने लगे है अब रोक
फास्ट जिंदगी का ये पाल रहे है सब शौक

बालाओ ने अब् बहुत बदल ली है अपनी सोच
शरीर के अंग दिखाने मे नही होता अब संकोच
बहन जी टाईप लगती है उन्हे अब हर वो औरत
ढका तन, शर्म और संस्कार  हो जिसकी शौहरत  

पा़श्चात्य संस्कृति से हुआ है इन सब्को प्यार
संस्कारो की बात पर तो चढता है इनको बुखार
रेव और डिस्को पार्टी मे ढल गये इनके विचार
आस्था और विश्वास का किया इन्होने तिरस्कार

ज्ञान - विज्ञान मे तो खूब बदली है शिक्षा
बस ना संभाल पाये जो बडे बूढो ने दी दीक्षा
मातृ् भाषा को छोड अंग्रेजी को बस ये जाने
जो हिन्दी बोले उस तो  वे बस पिछडा माने

शुभकामनाये है! जीवन का हर रण तुम जीत लो
बस अपनी संस्कृति और संस्कार तुम कभी ना भूलो
इस धरती का सम्मान करोहिंदुस्तान की शान तुमसे है
इस देश के तुम गौरव बनो,  हिंदुस्तान का मान तुमसे है

 - प्रतिबिम्ब ड़थ्वाल, अबु धाबी, यूए

गुरुवार, 5 अगस्त 2010

सोचा न था


सोचा न था

जिंदगी एक ख्वाब है
ख्वाब नासुर बन जायेगे
सोचा न था

दोस्ती एक अहसास है
अहसास भी यूँ बिखर जायेगे
सोचा न था

प्रेम एक विश्वास  है
विश्वास भी यूँ टूट जायेगा
सोचा न था

समाज एक आईना है
आईना भी सूरत बदल देगा
सोचा न था

देशभक्ति एक ज़ज्बा है
जज़्बात भी अब  बिकने लगगे
सोचा न था

सयुंक्त परिवार एक आदर्श है
आदर्श भी अब मुँह चिढाने लगेगे
सोचा न था

हिन्दुस्तान की अपनी संस्कृति है
संस्कृति का भी लोग मज़ाक उडायेगे
सोचा न था

आजादी में भी हाथ था शहीदो का
शहीदो को ही अब हम आंतकवादी कहेगे
सोचा न था

नेता जनता का प्रतिनिधि होता है
प्रतिनिधि ही अब जनता को लूटेगा
सोचा न था

एक दूजे के भावो मे थे हम और आप
आप अब किसी के हाथो की कठपुतली बन गये
सोचा न था

वादा था कि खोने न देगे अपना आज
आज आपने दूर होकर अपनी सोच  बदल ली
सोचा न था


-       प्रतिबिम्ब बड्थ्वाल, अबु धाबी, यूएई
०५.०८.२०१० 
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