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शुक्रवार, 15 फ़रवरी 2013

~ उधेड़बुन ~




उधेड़बुन
न जाने कितने
फटे पुराने विचारो को
फिर से अपनाना चाहती है

सुई रूपी हौसले से
आस रुपी धागे का
अस्तित्व को बचाने
एक जाल बनता जाता है  

अपने ही लोगो में
अपनी पुरानी तस्वीर दिखाता
अपने अस्तित्व का ऐलान करता 
अब भीड़ से अलग दिखता हूँ

जिंदगी की दौड़ में
नए ज़माने के दौर में
पुराना कब तक सहेज सकूंगा
उधेड़बुन अब भी ज्यों की त्यों है

-प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 

शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2013

नसीब




नसीब अपना - अपना 
आप हकीकत हम सपना 
आपके माई बाप, हम अनाथ
आपके महल, हमारा फुटपाथ

न भूख सहने को रोटी है 
न तन ढकने को वस्त्र है 
न कोई सुध हमारी लेता है 
न कोई अब हमें अपनाता है 

मिल जाये खाने को तो खा लेते है 
न मिले तो कहीं भूखे पेट सो लेते है 
मेरे सपनो को बस आँख मूँद देख लेता हूँ 
रहने को जमी और छत आसमा बन जाता है 

मैं चर्चा का विषय हर मंच पर बन जाता हूँ 
तस्वीरे दिखाते आप मैं सहानूभूति बन जाता हूँ 
क्या नेता, अब तो जनता भी हमें भुनाना जानती है 
हकीकत से दूर लेखो तस्वीरो में वाह वाह लूट ले जाते है 

आप तो पीते बोतल का पानी, हम गंदा पी, जी लेते है 
आपकी फेंकी बोतल से भी चप्पल का जुगाड़ कर लेते है 
महंगे रेस्टोरेंट में खाकर आप, 'टिप्स' खूब वहाँ दे कर आते है 
हमने फैलाये हाथ तो कर्म करने की आप नसीहत हमे दे जाते है 

- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 


(यह चित्र https://www.facebook.com/groups/tasvirkyabole/ "तस्वीर क्या बोले" समूह में पेश किया था  जिसे  पुन: ब्लॉग तस्वीर क्या बोले में भी प्रेषित किया गया था )



रविवार, 27 जनवरी 2013

कर्म




हवाए सर्द है 
प्रेम का मौसम गर्म है 
ठिठुर रहा तन 
दिल में छिपाये मर्म है 
आशिकों के शहर में 
मुस्कान में छिपा दर्द है  
मोहब्बत सिखाये धर्म 
फिर भी मन में छिपाये गर्द है 
अपराध होते आम 
घिनौनी मानसिकता देख आती शर्म है 
'प्रतिबिम्ब' जानता इतना 
इंसान की पहचान केवल उसका कर्म है 

मंगलवार, 8 जनवरी 2013

प्रेम में ......




प्रेम में भावो का
और
भावो में शब्दों का
गहरा नाता है

प्रेम में स्नेह का
और
स्नेह में आदर का
गहरा नाता है

प्रेम में समर्पण का
और
समर्पण में निष्ठा का
गहरा नाता है

प्रेम में गीत का
और
गीत में संगीत का
गहरा नाता है

प्रेम में साथ का
और
साथ में हाथ का
गहरा नाता है

प्रेम में खोने का
और
खोने में पाने का
गहरा नाता है

प्रेम में जिज्ञासा का
और
जिज्ञासा में ज्ञान का
गहरा नाता है

प्रेम में रूठने का
और
रूठने में मनाने का
गहरा नाता है

प्रेम में दोस्ती का
और
दोस्ती में विश्वास का
गहरा नाता है

प्रेम में रिश्ते का
और
रिश्ते में सम्मान का
गहरा नाता है

प्रेम में फूल का
और
फूल में खुशबू का
गहरा नाता है

प्रेम में वफ़ा का
और
वफ़ा में सच्चाई का
गहरा नाता है

प्रेम में प्यास का
और
प्यास में गहराई का
गहरा नाता है

प्रेम में आंखों का
और
आंखों में आँसू का
गहरा नाता है

प्रेम में मन का
और
मन में तस्वीर का
गहरा नाता है

प्रेम में ख़्वाब का
और
ख़्वाब में अहसास का
गहरा नाता है

प्रेम में दूरी का
और
दूरी में जुदाई का
गहरा नाता है

प्रेम में बातों का
और
बातो में प्रेम का
गहरा नाता है

- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल

मंगलवार, 1 जनवरी 2013

चलो बदल जाये



कल आज मे बदल गया
तारीख व साल बदल गया
तारीख तो अब रोज बदलेगी
ये साल भी हर साल बदलेगा
अब सवाल है हम कब बदलेंगे ?
चलो आज सवाल खुद से पूछ ले।
मान सम्मान सबका क्या कर पाएंगे ?
कुरीतियों को क्या हम बदल पाएंगे ?
विकृत मानसिकता को कैसे बदल पाएंगे ?
लड़का - लड़की का भेद क्या हम मिटा पाएंगे ?
इंसानियत जो भूल चुके क्या उसे फिर से पाएंगे ?
संस्कार संस्कृति को क्या घर मे फिर ला पाएंगे ?
नारी को घर मे नही बाहर भी क्या सुरक्षा दे पाएंगे?
स्वार्थ को भुला क्या हम एक दूजे को गले लगा पाएंगे ?
धर्म जाति रुतबे  के बिना क्या मानवता को पहचान पाएंगे?
अगर आप का उत्तर किसी भी बात पर हाँ है तो अवश्य हम बदल पाएंगे ..........

- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल

मंगलवार, 13 नवंबर 2012

रास्ते बदल गये : कमलेश चौहान ( गौरी)


रास्ते बदल गये : कमलेश चौहान ( गौरी)

Legal action will be taken if any line, words will be manipulated, exploited from above Poem
 


माना कि ये उस मालिक का दस्तूर है
कुछ पल सब कुछ है
कुछ पल देखो तो कुछ भी नहीं

कल जो दिल के करीब था, आज भी है
अब, सात समुद्र पार है
कल जो अपना था वो आज कहीं नहीं

ओह ! हम बहक गए थे किसी की बातों से
कैसे कटेगी ज़िन्दगी
मत पूछो जिसकी हमें खबर नहीं

चाँद महका था अमावस की रातों के बाद
वो कौनसी थी रात थी
मुझसे मत पूछो अब कुछ याद नहीं

उसने न जाने अनेकों नाम लिख दिए थे
अपने दिल पे
मेरा नाम याद रहे, यह जरूरी तो नहीं

दो रोज़ का हंसना हंसाना, गुनगुनाना
हसीं वादियों में
अब वो सर्द राते परायी है मेरी नहीं

भूली बिसरी यादों, दिल में बसेरा मत करो
वो जो निकला बेवफा
उस दोस्त का नाम दोहराना कोई ज़रूरी तो नहीं

लेखिका - कमलेश चौहान (गौरी)
All rights reserved with " Saat Janam Ke Baad" @ Kamlesh Chauhan(

सोमवार, 12 नवंबर 2012

आई दीवाली





राम लौट आया है
पिता की आज्ञा का पालन कर
रावण [बुराई] का वध कर
हाँ राम घर लौट आया है

रामायण एक कथा है एक लीला है
कुछ सिखलाने की खातिर
हर रिश्तों का इसमे उपयोग किया
अच्छे बुरे का भेद समझाकर
अच्छे को अपनाओं का संदेश दिया
आज भी अपनी स्वार्थ पूर्ति की खातिर
बुराई को जाने क्यों हमने अपना लिया
कुतर्क साध, भाव को खंडित कर
सिया राम के रिश्तो का अपमान किया
अच्छाई अपना न सके किन्तु
मूल भाव को तोड़, खूब इसका इस्तेमाल किया

आओ फिर दिये जलाए
वातावरण को जगमगाए
हर साल की तरह
इस साल भी आओ दिया जलाए

त्यौहार की खुशियों संग
आओ कुछ अपना ले
प्रेम - माँ और बेटे का
प्रेम - बेटे और पिता का
प्रेम - पति और पत्नी का
प्रेम - भाई और भाई का
प्रेम - भक्त और भगवान का
प्रेम - दोस्त और दोस्त का
धर्म - एक राजा का
कर्म - एक क्षत्रिय का
ज्ञान - एक कथा का
अंत  - एक बुराई का

एक दिया मन मे भी जला लेना
सच,  ईमानदारी और इंसानियत का
स्नेह - आदर और विश्वास का
दान - धर्म और भक्ति - भाव का

आओ मिल कर एक दिया जलाए
अहसास कराये जो 'हम'  होने का
एकता और सर्व - धर्म संभाव का

आओ मिलकर एक और दिया जलाए
धरती से स्नेह और राष्ट्र प्रेम का

~~ शुभं ~~

शनिवार, 22 सितंबर 2012

मैं येसा क्यों हूँ .....







मैं येसा इसलिए हूँ ......
क्योंकि जनता की नही मैडम की सुनता हूँ ..... 
मैं येसा ही हूँ ......

गरीबो को बहलाता हूँ .......
अमीरों को सहलाता हूँ ......
मैं येसा ही हूँ ......

आर्थिक नीति का हिमायती हूँ .....
कहने करने मे बहुत किफ़ायती हूँ .....
मैं येसा ही हूँ ......

मुलायम हो माया की सुनता हूँ .......
विपक्ष को चुप रहकर जलाता हूँ ......
मैं येसा ही हूँ ........

राहुल बाबा की कृपा है गद्दी पर हूँ ....
उनके लिए उतरने को तैयार हूँ ......
मैं येसा ही हूँ .....

जनता की हर नफ़्ज़ समझता हूँ ....
विपक्ष की फूट को खूब भुनाता हूँ ......
मैं येसा ही हूँ .....

कोई आवाज़ उठाए उसे दबाता हूँ .....
अपने कारनामो को दूसरे पर डालता हूँ ...
मैं येसा ही हूँ .....

वैसे सवालो पर बहुत कम बोलता हूँ ......
कभी मन हुआ तो जबाब शायरी मे देता हूँ .....
मैं येसा ही हूँ .....

समस्याओ के लिए जादू की छड़ी नही रखता हूँ ......
आंदोलन करने वालो पर डंडा खूब घुमाता हूँ ........
मैं येसा ही हूँ ......

पैसे पेड़ पर नही उगते ये कहता हूँ .....
अपने लोगो की जेब लेकिन खूब भरता हूँ .....  
मैं येसा ही हूँ ......

चलो अब चुनाव की तैयारी मे हूँ ....
ज़रा आपको देने लोलिपॉप की तैयारी करता हूँ ....
मैं येसा ही हूँ .....

-          बड़थ्वाल 

रविवार, 16 सितंबर 2012

मेरा नाचना - उनका नाचना

[यह रचना १६ जनवरी २०११ को लिखी थी]



मै नाचूं और पेट भरूं, चलाऊँ अपना छोटा/बडा सा परिवार
इसके लिये किसी महफिल की शान बनू या जाऊँ डांस बार

फेक जाते है लोग पैसा हर बार उस पर भी लगाये नज़र सरकार
किसी जलसे में मारु ठुमका तो मीडिया भी पूछती सवाल हज़ार

मेरी महफिल में आ जाये यदि कोई नेता या आये कोई खास
उनकी भी धज्जिया उडाते है और सबको लगता है ये बकवास

सभ्य समाज की बात और है, जमती है महफिल एक शाम के नाम
बदन बिकता है नाचता है किसी अवार्ड के नाम या चेरिटी के नाम

पैसा करोडो मे ले जाते है कभी शीला की जवानी कभी मुन्नी बदनाम के साथ
यंहा जो नेता अभिनेता या आये कोई खास, वो भी बडे हो जाते है उनके साथ 

उनकी अदा और बदन को खूब भुनाते लोग, हमे तवाइफ का नाम दे जाते है वो
डिस्को, रेव पार्टियो में जाकर देखो सभ्य लोगो,बताना कौन अश्लील है हम या वो

हमारे कपड़ो और उनके ना बराबर कपडो में भी कितना अंतर करते है सभ्य लोग
देख उनके लटके झटके, 'सेक्सी का या 'ज़ीरो फिगर' का खिताब देते है सभ्य लोग

मै जिस्म बेचूँ, कंही नाँचू तो ध्न्धा कंहते है इसे सभ्य लोग
वो बेचे - खरीदे तो 'इलीट' कहते है उन्हे सभ्य समाज के लोग

-       प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 


शुक्रवार, 24 अगस्त 2012

तुझ संग प्रीत लगाई हिन्दी



[ गीत 'तुझ संग प्रीत लगाई सजना' से प्रेरित होकर हिन्दी के लिए खासकर फेसबुक पर मित्रो के लिए    ]

तुझ संग प्रीत लगाई हिन्दी
हिन्दी हिन्दी ओ हिन्दी
भारत के माथे की बिंदी

आजा अब यहाँ पर तेरा प्रयोग करूँ
अपना नाम भी यहाँ हिन्दी मे लिख दूँ
मित्रो को भी तेरा उपयोग सिखा दूँ
एक तू ही मन को है भाई हिन्दी
हिन्दी हिन्दी ओ हिन्दी
भारत के माथे की बिंदी

तूने मुझे बचपन से बोलना सिखाया
अपने भावो को तूने लिखना सिखाया
दुख और सुख को कहना सिखाया
फिर भी अँग्रेजी तुझ पे भारी हिन्दी
हिन्दी हिन्दी ओ हिन्दी
भारत के माथे की बिंदी

तुझे सीखने अब सब आगे आए
अंतर्जाल पर कई सॉफ्टवेयर पाये
अब मित्रो से है अनुरोध करते जाये
इच्छा है सब लिखे पढे हिन्दी
हिन्दी हिन्दी ओ हिन्दी
भारत के माथे की बिंदी

- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल
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